30 जून तक गौशालाओं में चारा-भूसा उपलब्धता की समीक्षा पूर्ण करें


गौशालाओं में चारा, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाए


लापरवाही बरतने वाले सीवीओ के विरुद्ध होगी कड़ी कार्रवाई


प्रत्येक गौशाला में वृक्षारोपण किया जाय


संचारी रोगों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी एवं टीकाकरण सुनिश्चित करें


किसानों को उनके दुग्ध मूल्य का भुगतान हर माह अनिवार्य रूप से किया जाए


निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर संबंधित दुग्ध संघ के महाप्रबंधक पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी

-श्री धर्मपाल सिंह


लखनऊ: 22 जून, 2026



उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि 30 जून तक प्रदेश की गौशालाओं में चारे-भूसे की उपलब्धता की समीक्षा पूरी कर ली जाए। इस कार्य में लापरवाही करने वाले सीवीओ पर कड़ी कार्यवाही करते हुए निलंबित कर दिया जायेगा। अधिकारी सुनिश्चित करें कि प्रदेश की सभी गौशालाओं में निराश्रित गोवंशों हेतु हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे। बरसात के  दृष्टिगत जलभराव एवं संक्रामक रोगों से बचाव हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं की जाए।


श्री सिंह ने यह निर्देश आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में हरा चारा, भूसा एवं संचारी रोग की समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने संचारी रोगों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी एवं टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक गौशाला में कम से कम पांच पौधे ट्री-गार्ड सहित लगाने तथा उनके संरक्षण के निर्देश दिए। साथ ही सभी गौशालाओं में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन एवं गौशालाओं की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने  के उद्देश्य से गोबर गैस प्लांट स्थापित करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर शीघ्र क्रियाशील किए जाने पर बल दिया।


बैठक में बताया गया कि प्रदेश की गौआश्रय स्थलों में हरा चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुल 10,472.56 हेक्टेयर गोचर भूमि उपलब्ध है। वर्तमान में 5,654 ग्रामीण गौआश्रय स्थलों में 10,06,501 संरक्षित गौवंशों के लिए प्रतिदिन लगभग 5,032.51 मीट्रिक टन हरे चारे की आवश्यकता है। गोचर भूमि में से 975.78 हेक्टेयर पर नेपियर घास तथा 4,177.33 हेक्टेयर पर अन्य हरा चारा उगाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों द्वारा 5,215.27 हेक्टेयर भूमि पर हरे चारे का उत्पादन किया जा रहा है। अन्य भूमि पर 686.09 हेक्टेयर में नेपियर घास, 1,11,430.95 हेक्टेयर में अन्य हरा चारा तथा 1,12,675.40 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण एवं अन्य चारा आच्छादन किया गया है। कुल 2,890 कृषक हरा चारा उत्पादन कार्यक्रम से जुड़े हुए। 


खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में एफएमडी टीकाकरण अभियान का आठवां चरण 22 जुलाई से 4 सितम्बर 2026 तक संचालित किया जाएगा। अभियान हेतु 3.37 करोड़ से अधिक वैक्सीन जनपदों में उपलब्ध करा दी गई हैं तथा सभी जिलों से माइक्रो प्लान प्राप्त किए जा रहे हैं। एफएमडी टीकाकरण के लिए नई एसओपी भी जनपदों को भेज दी गई है। इसके अतिरिक्त भारत सरकार से प्राप्त 2 करोड़ बड़े पशुओं के टैग मांग के अनुसार जिलों में वितरित किए जा चुके हैं। भारत पशुधन ऐप पर 3.65 करोड़ से अधिक पशुओं का पंजीकरण किया गया है, जिसके सत्यापन, नए पंजीकरण तथा ग्राम पंचायतवार अभिलेखों के अद्यतन रख-रखाव के निर्देश दिए गए हैं।


दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा करते हुए श्री धर्मपाल सिंह ने निर्देश दिए कि किसानों को उनके दुग्ध मूल्य का भुगतान हर माह अनिवार्य रूप से किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान न करने पर संबंधित दुग्ध संघ के महाप्रबंधक पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी। प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत में नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाए, जिससे अधिकाधिक पशुपालकों को सहकारिता से जोड़ा जा सके तथा उनकी आय में वृद्धि हो। पराग के दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ घी, पनीर, दही, छाछ एवं अन्य उपोत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग एवं विपणन किया जाए, ताकि बाजार में उनकी पहुंच और मांग बढ़ सके। श्री सिंह ने कहा कि दुग्ध समितियों के विस्तार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि तथा मूल्यवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में दुग्ध क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने मंत्री जी को विभाग की अद्यतन प्रगति से अवगत कराया तथा आश्वासन दिया कि बैठक में प्राप्त सभी निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने निराश्रित गोवंश संरक्षण के अंतर्गत मंडलवार एवं जनपदवार भूसा प्रबंधन, हरे चारे की बुवाई की स्थिति, संचारी रोग नियंत्रण, टीकाकरण लक्ष्यों की प्रगति तथा दुग्ध समितियों के संचालन संबंधी विषयों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि अवस्थापना कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता का विेशेष ध्यान दिया जाये। लघु पशु योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये।


बैठक में विशेष सचिव, पशुधन श्री देवेन्द्र पाण्डेय, विशेष सचिव, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव श्री राम सहाय यादव, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, अपर निदेशक डॉ. संगीता तिवारी, डॉ राम सागर सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं योजनाधिकारी उपस्थित रहे।


सम्पर्क सूत्र- निधि वर्मा