‘विद्युत सखी योजना‘ से महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी
शामली की अनीता

दिनांक: 11 जून, 2026

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘विद्युत सखी योजना‘ ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल गवर्नेंस (अंकीय अभिशासन) के त्रिवेणी संगम के रूप में उभरकर सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (छत्स्ड) के अंतर्गत क्रियान्वित इस महत्वाकांक्षी योजना ने न केवल ग्रामीण अंचलों में विद्युत देयकों के संग्रहण की प्रक्रिया को अत्यंत सुगम एवं पारदर्शी बनाया है, अपितु ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन प्रदान कर समाज में उन्हें एक नवीन व गरिमापूर्ण पहचान भी दी है।

पूर्व में, ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को अपने विद्युत देयकों का भुगतान करने के लिए लंबी दूरियां तय कर विद्युत उपकेंद्रों तक जाना पड़ता था, जिससे उनके अमूल्य समय और धन दोनों का अपव्यय होता था। इसी समस्या के स्थायी निवारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वयं सहायता समूह (भ्ळ) से संबद्ध महिलाओं को ‘विद्युत सखी‘ के रूप में तैनात करने का दूरदर्शी निर्णय लिया।

इस अभिनव व्यवस्था के अंतर्गत चयनित महिलाओं को शासन तथा उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (न्च्च्ब्स्) द्वारा विशेष तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके पश्चात, उन्हें स्मार्टफोन और ब्लूटूथ थर्मल प्रिंटर अथवा स्वाइप मशीन जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनके माध्यम से वे विभाग के आधिकारिक ऐप्लिकेशन द्वारा उपभोक्ताओं के देयकों की जांच करती हैं और संबधित स्थल पर ही नकद अथवा डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार कर तत्काल आधिकारिक रसीद उपलब्ध कराती हैं।

इन विद्युत सखियों की आय पूर्णतः उनके द्वारा संग्रहित किए गए राजस्व पर आधारित प्रोत्साहन राशि (लाभांश) के रूप में होती है। इसके तहत ₹2,000 तक के विद्युत देयकों के संग्रहण पर ₹20 प्रति बिल की निश्चित प्रोत्साहन राशि देय है, तथा ₹2,000 से अधिक की धनराशि के देयकों पर कुल संग्रहित राशि का 1 प्रतिशत लाभांश प्रदान किया जाता है।

इस योजना की जमीनी सफलता और इसके दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के ऊन विकास खंड स्थित हसनपुर गांव की निवासी 35 वर्षीय श्रीमती अनीता की जीवन-यात्रा से भली-भांति समझा जा सकता है। सैनी समाज से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती अनीता आज भारती महिला ग्राम संगठन के अंतर्गत संचालित ‘सृष्टि स्वयं सहायता समूह‘ की एक अत्यंत सक्रिय और ऊर्जावान सदस्य हैं। तथापि, कुछ वर्ष पूर्व तक उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत संबलहीन थी।

समूह से जुड़ने से पूर्व, उनके पति गांव में ही एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते थे, जिससे होने वाली सीमित आय से संपूर्ण परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत दुष्कर था। जीविकोपार्जन का कोई अन्य साधन न होने के कारण अनीता सदैव अपने बच्चों के भविष्य और परिवार की दयनीय माली हालत को लेकर मानसिक रूप से उद्विग्न और चिंतित रहती थीं। अपने जीवन को सुधारने का अवसर उन्हें तब मिला जब  वर्ष 2018 में उनके गांव में संचालित सीआरपी (कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन) अभियान के दौरान वह ‘सृष्टि स्वयं सहायता समूह‘ से सम्बद्ध हुईं। समूह से जुड़ने के उपरांत उन्होंने सर्वप्रथम सी०आई०एफ० (सामुदायिक निवेश निधि) से ऋण प्राप्त किया और उस पूंजी से अपने पति के व्यवसाय का विस्तार किया।

इसके पश्चात, वर्ष 2022 में उनके जीवन में एक नया अवसर तब आया जब उनका चयन ‘विद्युत सखी‘ के रूप में हुआ। इस सुअवसर ने अनीता को घर की चहारदीवारी और घूंघट की रूढ़िवादिता से बाहर निकलकर समाज में अपनी क्षमता सिद्ध करने का संबल दिया। उन्होंने पूरे मनोयोग और कर्तव्यनिष्ठा के साथ गांव-गांव, घर-घर जाकर विद्युत देयकों के संग्रहण का कार्य आरंभ किया।

उनकी निरन्तर मेहनत और अटूट प्रयासों का ही प्रतिफल है कि उन्होंने अब तक ₹7 करोड़ से अधिक का विद्युत राजस्व संग्रहित कर बिजली विभाग के कोष में जमा कराया है। इस अनुकरणीय कार्य के बदले उन्होंने वित्तीय वर्ष 2022-23 से वर्तमान तक ₹7 लाख से अधिक की संचयी प्रोत्साहन राशि (लाभांश) अर्जित की है, जिसने उन्हें आज अपने क्षेत्र में एक गौरवशाली ‘लखपति दीदी‘ के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया है। वर्तमान में, वे इस कार्य से प्रतिमाह लगभग ₹20,000 से ₹25,000 तक का लाभांश प्राप्त कर रही हैं, जिससे उनके परिवार के जीवन स्तर और मासिक आय में सम्मानजनक संवर्द्धन हुआ है।

विद्युत सखी के रूप में अपनी सेवाएं देने से न केवल अनीता का परिवार आज पूर्णतः ऋणमुक्त हो चुका है और उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने में भी उन्हें एक विशिष्ट व सुदृढ़ पहचान हासिल हुई है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए वे गर्व से कहती हैं कि इस मंच ने उन्हें न केवल आत्मनिर्भरता दी है, बल्कि समाज में आदरणीय स्थान भी दिलाया है। समूह के माध्यम से उनमें पारस्परिक सद्भाव, एकजुटता और समाज के समक्ष आत्मविश्वास के साथ संवाद करने के कौशल का अभूतपूर्व विकास हुआ है।
आज श्रीमती अनीता अपनी ग्राम पंचायत तथा निकटवर्ती क्षेत्रों की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा और नारी सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बन चुकी हैं। वास्तव में, उत्तर प्रदेश शासन की ‘विद्युत सखी‘ योजना मात्र बिजली विभाग के राजस्व संवर्द्धन का तंत्र नहीं है, वरन यह अनीता जैसी सहस्रों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में खुशहाली का सूत्रपात करने, उन्हें स्वावलंबी बनाने और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में ‘डिजिटल सहेली‘ के रूप में एक मौन, किंतु अत्यंत प्रभावी सामाजिक-आर्थिक क्रांति को गति देने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है।
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जनपद: शामली