उत्तर प्रदेश की कॉक्लियर इम्प्लांट योजना ने बदला जौनपुर की मासूम आयत का जीवन

दिनांक: 13 जून, 2026

कहते हैं कि जब मानवीय संवेदना, सही समय पर सही उपचार और सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां एक साथ मिल जाएं, तो जीवन की कठिन से कठिन चुनौती भी एक सुंदर अवसर में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही भावुक और जीवन को नई दिशा देने वाला उदाहरण प्रस्तुत किया है जौनपुर जनपद के केराकत तहसील, चंदवक थाना अंतर्गत ग्राम मढ़ी निवासी चार वर्षीय मासूम आयत शेख ने। जन्म से ही पूरी तरह मूक-बधिर रही इस बच्ची के जीवन में उत्तर प्रदेश सरकार की श्कॉक्लियर इम्प्लांट योजनाश् ने न सिर्फ एक नई रोशनी और उम्मीद का संचार किया है, बल्कि उसके पूरे परिवार को खुशियों की एक ऐसी दुनिया सौंपी है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। आज आयत के चेहरे की मुस्कान और उसके होठों से निकलने वाले शब्द उत्तर प्रदेश सरकार की इस संवेदनशील पहल की सफलता की जीवंत कहानी बयां कर रहे हैं।

आयत शेख जब इस दुनिया में आई, तो माता-पिता की खुशियों का ठिकाना नहीं था, लेकिन समय बीतने के साथ ही परिवार को एक गहरे सदमे का सामना करना पड़ा। माता-पिता ने महसूस किया कि उनकी लाडली न तो अपने आसपास की आवाजों पर कोई प्रतिक्रिया देती है और न ही बच्चों की तरह तुतलाकर कुछ बोलने का प्रयास करती है। चिकित्सीय जांच के बाद यह कड़वा सच सामने आया कि आयत जन्म से ही गंभीर रूप से श्रवण बाधित है। वह सन्नाटे की एक ऐसी दुनिया में कैद थी जहां न तो मां की ममता भरी पुकार पहुंच सकती थी और न ही पिता का दुलार। परिवार के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और हृदयविदारक थी। माता-पिता अपनी मासूम बेटी के भविष्य को लेकर दिन-रात निरंतर चिंतित रहते थे। एक सामान्य जीवन जीना, स्कूल जाना और समाज की मुख्यधारा में शामिल होना आयत के लिए एक असंभव सपना प्रतीत हो रहा था।

श्रवणवादिता से पीड़ित बच्चों के लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में श्कॉक्लियर इम्प्लांटश् एक वरदान की तरह है। यह एक अत्यंत परिष्कृत और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सामान्य हियरिंग एड से बिल्कुल अलग होता है। सामान्य हियरिंग एड जहां केवल आवाज की तीव्रता को बढ़ाता है, वहीं कॉक्लियर इम्प्लांट कान के क्षतिग्रस्त हिस्सों को पूरी तरह बायपास करके सीधे श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित करता है, जिससे मस्तिष्क तक ध्वनि के संकेत पहुंचने लगते हैं। हालांकि, यह तकनीक जितनी आधुनिक और प्रभावी है, इसकी प्रक्रिया और सर्जरी उतनी ही खर्चीली है। इस पूरी सर्जरी, उपकरण की लागत और उसके बाद महीनों तक चलने वाली अनिवार्य स्पीच थेरेपी का कुल खर्च लगभग 6 से 7 लाख रुपये या उससे भी अधिक आता है। जौनपुर के ग्रामीण परिवेश में रहने वाले एक मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार के लिए इतनी बड़ी धनराशि का प्रबंध करना पूरी तरह असंभव था।

इसी निराशा के बीच,आयत के परिवार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एक मसीहा और रक्षक बनकर सामने आया। परिवार को विभाग के माध्यम से संचालित की जा रही श्कॉक्लियर इम्प्लांट योजनाश् की जानकारी प्राप्त हुई। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही यह योजना राज्य के गरीब परिवारों के उन मूक-बधिर बच्चों के लिए एक संजीवनी है, जो धन के अभाव में इस महंगे इलाज से वंचित रह जाते हैं। सरकार इस योजना के अंतर्गत चिन्हित और पात्र बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट हेतु शत-प्रतिशत निःशुल्क वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि बचपन में ही बहरेपन का इलाज कर बच्चों को एक विकलांगता मुक्त और सम्मानजनक जीवन दिया जा सके।

योजना की जानकारी मिलते ही आयत के पिता ने बिना समय गंवाए जौनपुर के जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय से संपर्क किया। स्थानीय प्रशासन और विभाग ने मामले को अत्यंत गंभीरता, तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ लिया। प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाते हुए आयत के आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण जैसे बीईआरए (ठम्त्।) टेस्ट और अन्य जरूरी जांचें बेहद कम समय में पूरी कराई गईं। इसके बाद, जिला कार्यालय द्वारा तैयार किए गए आवेदन को उच्च स्तर पर भेजा गया, जहां शासन और निदेशालय स्तर से त्वरित गति से बजट और औपचारिकता का अनुमोदन प्राप्त हो गया। सरकार द्वारा बजट स्वीकृत होने के बाद, विभाग के इम्पैनल्ड अस्पताल में 16 नवंबर 2025 को आयत का कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन पूरी तरह से सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया।

कॉक्लियर इम्प्लांटेशन की सफलता केवल ऑपरेशन थियेटर तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि असली चुनौती सर्जरी के बाद शुरू होती है। ऑपरेशन के बाद बच्चे के मस्तिष्क को नई आवाजों को पहचानने और भाषा को समझने के लिए तैयार करना होता है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत नियमित रूप से मुफ्त स्पीच थैरेपी और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। 

जौनपुर के इस परिवार ने भी चिकित्सकीय मार्गदर्शन का पूरी निष्ठा से पालन किया और आयत को नियमित रूप से थेरेपी दिलाई। उपचार और पुनर्वास के सकारात्मक परिणाम बहुत ही शीघ्र और चमत्कारी रूप से दिखाई देने लगे। जो बच्ची पहले पूरी तरह शांत और सन्नाटे में रहती थी, वह अब अपने आसपास होने वाली छोटी से छोटी ध्वनि के प्रति भी सजग होने लगी। धीरे-धीरे उसने अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की आवाजों को पहचानना शुरू किया और अंततः अपने नन्हे होठों से बोलने का प्रयास भी करने लगी। निरंतर अभ्यास और डॉक्टरों की देखरेख से उसकी सुनने और बोलने की क्षमता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया।

इस पूरी परिवर्तनकारी यात्रा का सबसे सुखद और भावुक क्षण 06 मई 2026 को आया। इस दिन विभागीय उपनिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जौनपुर जनपद की इस नन्ही बेटी आयत की प्रगति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया। इस दौरान जब चार वर्ष की आयत ने प्रशासन और चिकित्सकों के सामने प्रतिक्रिया दी, आवाजों को सुना और अपनी संवाद क्षमता का प्रदर्शन किया, तो वहां उपस्थित सभी जिम्मेदार, विशेषज्ञ और चिकित्सक भी खुशी से उत्साहित हो उठे। आयत के माता-पिता के चेहरे पर जो संतोष और असीम खुशी की चमक थी, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। उनकी बेटी अब एक मूक और बधिर जीवन के अंधकार से बाहर निकलकर, आत्मविश्वास के साथ एक सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर अपने कदम बढ़ा रही थी।

जौनपुर की आयत शेख की यह सफलता की कहानी केवल एक बच्ची के ठीक होने का किस्सा नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की कॉक्लियर इम्प्लांट योजना की जमीनी प्रभावशीलता, पारदर्शिता और जनकल्याणकारी सोच का एक सशक्त और जीवंत प्रमाण है। उत्तर प्रदेश सरकार का दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग इस योजना के माध्यम से राज्य के हर उस गरीब परिवार के साथ खड़ा है जिसके बच्चे इस मूक-बधिरता के दंश को झेल रहे हैं। 

योजना के नियमों के अनुसार, इसके लिए आवेदक परिवार का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना और परिवार की वार्षिक आय गरीबी रेखा के नीचे या शासन द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर होना आवश्यक है। योजना में मुख्य रूप से 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इस आयु वर्ग में बच्चों के मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है, जिससे वे सर्जरी के बाद नई भाषा और बोलना बेहद आसानी से और जल्दी सीख जाते हैं। आवेदन के लिए जिला अस्पताल या सरकारी मेडिकल कॉलेज के ई.एन.टी. विशेषज्ञ द्वारा प्रमाणित दिव्यांगता प्रमाण पत्र, ऑडियोमेट्री या ठम्त्। टेस्ट रिपोर्ट, आय, निवास और माता-पिता के पहचान पत्रों की आवश्यकता होती है, जिसे ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी जिला कार्यालय के माध्यम से जमा किया जा सकता है।

आज जौनपुर की आयत की खिलखिलाती हुई मुस्कान, उसकी लगातार बढ़ती संवाद क्षमता और जीवन के प्रति उसका नया उत्साह इस बात की गवाही दे रहा है कि यदि समय पर सही उपचार, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और सरकार की संवेदनशील नीतियों का संरक्षण मिल जाए, तो किसी भी मासूम का पूरा भविष्य बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की इस अनूठी और संवेदनशील पहल से अब तक राज्य के हजारों बच्चों को श्आवाज की दुनियाश् वापस मिली है।

 जौनपुर जनपद के एक छोटे से गांव मढ़ी से निकली आयत की यह प्रेरक यात्रा आज प्रदेश के उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन चुकी है, जो अपने बच्चों के मौन से परेशान हैं। शासन और प्रशासन के सहयोग से सही समय पर उठाया गया एक सही कदम किसी भी बच्चे के जीवन में खुशियों का नया सवेरा ला सकता है।

------------------------------------------

जनपद: जौनपुर