महिला सशक्तिकरण की दिशा में सीआईआरजी की पहल, बकरी आधारित उद्यमों पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न, खेत बचाओ अभियान पर दिया विशेष बल
महिला किसान दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मखदूम द्वारा दिनांक 24 जून, 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य विषय “महिला नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों का सशक्तिकरण” था, जिसका उद्देश्य बकरी पालन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व क्षमता तथा आर्थिक सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा देना था ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अभिजीत मित्रा, कुलपति, दुवासु विश्वविद्यालय, मथुरा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. एच. के. नरूला की गरिमामयी उपस्थिति रही । इसके अतिरिक्त विभिन्न संस्थानों के निदेशक, वैज्ञानिक, शोधार्थी, गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.), किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.), रिलायंस फाउंडेशन, टाटा ट्रस्ट, निरफाद, लुपिन एवं मंजरी फाउंडेशन सहित 17 विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित 150 से अधिक महिला किसानों की उपस्थिति रही ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ परिषदीय गीत, अतिथियों के स्वागत एवं जल-भरो कार्यक्रम के साथ हुआ । इस अवसर पर संस्थान के प्रकाशन “बकरी पालन: विज्ञान, प्रबंधन एवं उद्यमिता”, “सीआईआरजी सक्सैस स्टोरीज”, “सीआईआरजी एट ए ग्लांस”, न्यूजलेटर-अजामुख, ई-न्यूज – गोटेक ई-टाइम्स तथा “सीआईआरजी तकनीकी इन्वेंट्री” का विमोचन भी किया गया । साथ ही मुख्य अतिथि ने निदेशक एवं वैज्ञानिकों के साथ विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) एवं संस्थाओं की प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण एवं अवलोकन किया ।
संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने अपने संबोधन में चार मॉडल बकरी गांवों की स्थापना तथा बकरी पालकों को संपूर्ण वैल्यू चेन उपलब्ध कराने की संस्थान की योजना की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से महिला किसानों से बकरी पालन की आधुनिक तकनीकों को अपनाने एवं संस्थान से जुड़कर लाभान्वित होने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसान जैविक खेती एवं हरित खाद के उपयोग को प्राथमिकता दें एवं उर्वरकों व कीटनाशकों का कम से कम उपयोग करें ।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. एच. के. नरूला ने कहा कि कभी बकरी को “गरीब की गाय” कहा जाता था, लेकिन आज यह “गरीब का ए.टी.एम.” बन चुकी है। उन्होंने महिला किसानों को एफ.पी.ओ. के गठन हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि इससे उनकी सामूहिक मोल भाव क्षमता एवं बाजार तक पहुंच में वृद्धि होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के “विकसित भारत” के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का मार्ग विकसित गांवों से होकर गुजरता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अभिजीत मित्रा, कुलपति, दुवासु विश्वविद्यालय, मथुरा ने अपने संबोधन में कहा कि बकरी पालन क्षेत्र को वर्तमान स्तर तक पहुंचाने में बकरी पालकों की मेहनत एवं समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है । उन्होंने बकरी एवं भेड़ क्षेत्र में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, जैव सुरक्षा उपायों को अपनाने तथा पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड एवं बीमा योजनाओं से जोड़ने पर बल दिया । उन्होंने सीआईआरजी द्वारा विकसित बकरी उत्पादों के ई-कॉमर्स माध्यम से विपणन, महिला संचालित उद्यमों को बढ़ावा देने तथा एफ.पी.ओ. की तर्ज पर गोट प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (जी.पी.ओ.) के गठन का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि बकरी पालन की सफलता के लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रभावी विपणन एवं मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है ।
कार्यशाला के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा महिला किसानों के साथ संवाद करते हुए यह बताया गया कि आधुनिक प्रौद्योगिकियां एवं सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियां महिला-नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों को किस प्रकार अधिक सशक्त, लाभकारी एवं टिकाऊ बना सकती हैं । साथ ही पैनल संवाद के दौरान वैज्ञानिक बकरी पालन अपनाने पर विशेष बल दिया गया । इस अवसर पर “महिला किसानों की आवाज़: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ एवं सशक्त भविष्य की ओर मार्गदर्शन” विषय पर विचार-विमर्श किया गया । साथ ही बकरी क्षेत्र के संवर्धन में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) की भूमिका, विशेषकर बकरी उत्पादों के प्रसंस्करण एवं विपणन के संदर्भ में भी चर्चा हुई । विभिन्न एन.जी.ओ., एफ.पी.ओ. एवं सी.एस.आर. संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी विकसित एवं व्यवसायिक बकरी पालन के संबंध में अपने विचार साझा किए ।
कार्यक्रम के दौरान सफल एवं प्रगतिशील महिला बकरी पालकों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया गया तथा उनका वैज्ञानिकों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ सीधा संवाद आयोजित किया गया । कार्यशाला में प्रतिभागियों को बकरी पालन से संबंधित नवीनतम तकनीकों, वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों, विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा विकासोन्मुख परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इससे महिला उद्यमियों को अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी, प्रतिस्पर्धी एवं टिकाऊ बनाने में सहायता मिलेगी ।
कार्यक्रम के दौरान बकरी पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रगतिशील महिला बकरी पालकों को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान उनके नवाचार, उद्यमशीलता एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान को मान्यता प्रदान करता है । यह कार्यक्रम महिलाओं की आजीविका संवर्धन, उद्यमिता विकास तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा ।
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय कार्यशाला महिला किसानों के ज्ञानवर्धन, क्षमता निर्माण तथा बकरी आधारित उद्यमों के सतत विकास हेतु एक प्रभावी मंच के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुई । इस कार्यशाला से जो संस्तुतियां निकल कर आयी है उन्हें विभिन्न राज्यों की सरकारों के साथ साझा किया जाएगा जोकि बकरी पालन के क्षेत्र से संबंधित नीति निर्माण में सहायक होगीं ।
कार्यक्रम के सदस्य सचिव डॉ0 अनुपम कृष्ण दीक्षित, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करते हुए राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया ।


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