दुग्ध उत्पादन, ग्रामीण समृद्धि और महिला सशक्तिकरण की दिशा में नन्द बाबा दुग्ध मिशन बना आर्थिक सम्बल


लखनऊ: 06 जून, 2026

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने तथा प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से “नंद बाबा दुग्ध मिशन’’ को एक महत्वाकांक्षी एवं दूरदर्शी पहल के रूप में संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार दुग्ध विकास को ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार मानते हुए पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को नई दिशा प्रदान कर रही है। यह मिशन न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का माध्यम बन रहा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार सृजन, सहकारिता विस्तार और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी तैयार कर रहा है।
नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत प्रदेश में उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली स्वदेशी गायों-गिर, साहीवाल, थारपारकर एवं हरियाणा नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। “मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना” के माध्यम से प्रदेश सरकार पशुपालकों को इन नस्लों की गायों के पालन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। योजना के तहत महिला पशुपालकों को विशेष प्राथमिकता देते हुए 50 प्रतिशत अनुदान अथवा अधिकतम 80 हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्वदेशी नस्ल आधारित डेयरी गतिविधियों से जोड़कर स्थायी आय का स्रोत विकसित करना है। प्रदेश में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक विभिन्न योजनाओं में 9255 से अधिक लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है।
नन्द बाबा दुग्ध मिशन योजना के अंतर्गत पशुपालकों को केवल गाय क्रय हेतु ही नहीं, बल्कि आधुनिक पशुपालन के लिए आवश्यक संसाधनों हेतु भी सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें पशु शेड निर्माण, चारा काटने की मशीन, साइलेज यूनिट, पशु बीमा, खनिज मिश्रण, पशु आहार तथा अन्य डेयरी उपकरणों को शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पशुपालकों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक डेयरी प्रबंधन की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, जिससे दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके।
इस योजना के लिए न्यूनतम दो स्वदेशी गायों की इकाई निर्धारित की गई है, जिससे छोटे एवं सीमांत पशुपालकों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है। लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए ग्राम स्तर पर आवेदन प्रक्रिया संचालित की जा रही है। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर चयन एवं स्वीकृति की प्रक्रिया पूर्ण की जा रही है। योजना में लाभ लेने के लिए आवेदन की समयसीमा 45 दिन निर्धारित की गई है, जिससे पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाता है।
प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना” भी लागू की है। इसके तहत उच्च गुणवत्ता वाला दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को 10 हजार रुपये अथवा 15 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं। योजना का उद्देश्य पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने, पशुओं की बेहतर देखभाल करने तथा गुणवत्तायुक्त दुग्ध उत्पादन के लिए प्रेरित करना है।
दुग्ध सहकारिता को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश सरकार गांव स्तर पर “प्राथमिक बहुउद्देशीय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों” का व्यापक गठन कर रही है। इन समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को संगठित कर उन्हें सीधे बाजार एवं दुग्ध प्रसंस्करण व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक समिति के माध्यम से गांव स्तर पर दुग्ध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण तथा विपणन की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकों को बिचौलियों से मुक्त कर उचित मूल्य दिलाना प्रमुख है।
इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से वर्ष 2025-26 तक बड़े स्तर पर दुग्ध सहकारी समितियों के गठन का अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अवधि में 3201 नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्ष 2026-27 में 4000 से अधिक अनाच्छादित ग्राम पंचायतों को दुग्ध सहकारिता नेटवर्क से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक समिति वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन और आधुनिक दुग्ध विपणन प्रणाली से जुड़ी हो।
मिशन के तहत दुग्ध समिति के गठन हेतु कम से कम 40 दुग्ध उत्पादक यदि अपना दुग्ध समिति को विक्रय करना चाहते है और उनका दुग्ध उत्पादन प्रतिदिन 70 लीटर अथवा उससे अधिक हो। ऐसे समूहों को दुग्ध संग्रहण केंद्र, परिवहन सुविधा तथा विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समिति के कार्यसंचालन के लिए सभी आवश्यक उपकरण और साधन सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाते है।
प्रदेश सरकार द्वारा डेयरी क्षेत्र में आधुनिक अवसंरचना के विकास पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों, चिलिंग प्लांट, गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा शीत श्रृंखला प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है। इससे दुग्ध की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है। मिशन के अंतर्गत पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, संतुलित पशु आहार, नस्ल सुधार एवं वैज्ञानिक पशुपालन से संबंधित नियमित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे है।
नन्द बाबा दुग्ध मिशन उत्तर प्रदेश सरकार की ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण एवं किसान कल्याण के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सम्बल बनकर उभरा है। यह मिशन गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न कर रहा है तथा पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन, सहकारिता विस्तार और आधुनिक डेयरी प्रबंधन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बने। नंद बाबा दुग्ध मिशन इसी दिशा में ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम सिद्ध हो रहा है।