मत्स्य पालन से रुखसाना ने हाथरस में लिखी महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई इबारत
दिनांक: 29 जून, 2026
भारत में नीली क्रांति को एक नई गति देने और पारंपरिक मछुआरों व मछली पालकों की आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) संचालित की जा रही है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग द्वारा क्रियान्वित यह योजना भारतीय मत्स्य क्षेत्र में एक बड़ा निवेश कार्यक्रम है। देश में टिकाऊ, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना इस योजना का मूल संकल्प है। यह संपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम दो प्रमुख घटकों के माध्यम से धरातल पर कार्य करता है, जिसमें शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित ‘केंद्रीय क्षेत्र की योजना‘ और केंद्र व राज्यों के बीच निर्धारित अनुपात में खर्च साझा करने वाली ‘केंद्र प्रायोजित योजना‘ शामिल हैं।
इस व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य की योजना में पारंपरिक मत्स्य पालन के तौर-तरीकों को बदलकर उसमें आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को शामिल करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी क्रम में देश भर में बड़ी संख्या में रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और नवीन बायो-फ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जो बेहद कम पानी और सीमित भूमि क्षेत्र में भी उच्च घनत्व के साथ अधिक मछली उत्पादन सुनिश्चित करती हैं। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से नए आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और मूल्य-संवर्धित प्रसंस्करण उद्यम स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू विपणन तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए हजारों की संख्या में अत्याधुनिक रिटेल फिश मार्केट और मोबाइल कियोस्क को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अपनी राज्य स्तरीय नीतियों और योजनाओं के साथ समेकित किया है। ‘मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना‘ और उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ मत्स्य नीति के माध्यम से राज्य सरकार मछुआरों के कल्याण, मत्स्य बीजों की उपलब्धता और अंतर्देशीय जल संसाधनों (तालाबों व पोखरों) के पट्टे आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी व सुलभ बना रही है। राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मत्स्य उत्पादन केंद्र बनाने के लिए बुनियादी ढांचा विकास और वित्तीय रियायतों पर विशेष ध्यान दे रही है। केंद्रीय योजना के प्रावधानों के अनुरूप ही राज्य का मत्स्य विभाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को अधिकतम 60 प्रतिशत तक की विशेष वित्तीय सब्सिडी का लाभ समय पर प्रदान कर रहा है, जबकि अन्य सामान्य श्रेणियों के लिए 40 प्रतिशत अनुदान देय है।
मछुआरों और मछली पालकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधा से व्यापक स्तर पर जोड़ा गया है, ताकि बैंकों से कार्यशील पूंजी के लिए आसानी से और बेहद कम ब्याज दर पर ऋण मिल सके। इसके अतिरिक्त, वार्षिक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि या लीन पीरियड के दौरान मछुआरा परिवारों को भुखमरी और कुपोषण से बचाने के लिए विशेष आजीविका और पोषण सहायता प्रदान की जाती है। छोटे मछली पालकों को संगठित कर बाजार में मोलभाव की शक्ति बढ़ाने के लिए मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) का गठन तेजी से किया जा रहा है।
योजना की इसी कल्याणकारी नीति, दूरदर्शी सोच और राज्य सरकार के सक्रिय प्रयासों को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश के हाथरस जनपद में महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन और प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। विकास खंड सासनी के अंतर्गत मस्जिद वाली गली कसाना की निवासी श्रीमती रुखसाना पत्नी श्री शहजाद आज आधुनिक मत्स्य पालन और विपणन के क्षेत्र में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं। इस चुनौतीपूर्ण दौर में जब ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधन अत्यंत सीमित हो रहे थे, उन्होंने स्थानीय संसाधनों का कुशलता से उपयोग कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक नया, साहसिक और अनुकरणीय प्रयास प्रारंभ किया।
श्रीमती रुखसाना ने पुरुषों के वर्चस्व वाले इस पारंपरिक व्यवसाय क्षेत्र में कदम रखकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया, बल्कि ग्रामीण समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार का एक नया, आधुनिक और सम्मानजनक मार्ग प्रशस्त किया। उनकी इस चुनौतीपूर्ण लेकिन गौरवमयी सफलता की यात्रा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। वित्तीय वर्ष 2022-23 में, जिसका वास्तविक क्रियान्वयन वर्ष 2023-24 में सुनिश्चित हुआ, मत्स्य विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत उनका चयन आधुनिक मत्स्य विक्रय के लिए ‘कियोस्क निर्माण‘ की विशिष्ट परियोजना के लिए किया गया।
एक महिला लाभार्थी होने के नाते नियमानुसार रुखसाना को इस आधुनिक कियोस्क निर्माण की कुल परियोजना लागत पर 60 प्रतिशत का भारी अनुदान प्राप्त हुआ, जिसके तहत उन्हें ₹06.00 लाख की एक बड़ी वित्तीय सहायता राशि सीधे तौर पर डीबीटी के माध्यम से प्रदान की गई। इस बड़ी सरकारी मदद, मत्स्य विभाग के तकनीकी सहयोग और जिला प्रशासन हाथरस के निरंतर मार्गदर्शन की बदौलत उन्होंने ग्राम सासनी देहात, नानउ रोड स्थित परियोजना स्थल पर अपने सपनों के व्यवसाय की एक मजबूत, स्वच्छ और वैज्ञानिक बुनियाद रखी। इस आधुनिक कियोस्क के निर्माण के पश्चात उन्होंने पूरी व्यावसायिक कुशलता, लगन और निष्ठा के साथ मत्स्य विक्रय के क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया।
श्रीमती रुखसाना ने पारंपरिक खुले बाजारों के ढर्रे से पूरी तरह हटकर उपभोक्ताओं की सुविधा, हाइजीन, स्वच्छता और उत्तम गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया, जिससे बेहद कम समय में पूरे हाथरस जनपद में उन्होंने अपनी एक विशिष्ट और विश्वसनीय पहचान बना ली। आज उनके इस आधुनिक कियोस्क और उनके काम करने के व्यवस्थित व स्वच्छ तरीके की स्थानीय उपभोक्ताओं द्वारा खूब सराहना की जाती है। समय के साथ उन्होंने स्थानीय बाजार की मांग और उपभोक्ताओं की पसंद को गहराई से समझा और अपने व्यवसाय का निरंतर विस्तार किया। वर्तमान में वे इस आधुनिक कियोस्क यूनिट में उच्च प्रोटीन युक्त पंगेशियस मछली के साथ-साथ भारतीय मेजर कार्प (जैसे रोहू, कतला और नैन) जैसी लोकप्रिय और मांग वाली मत्स्य प्रजातियों का भी नियमित रूप से बड़े पैमाने पर विक्रय कर रही हैं।
वर्तमान में श्रीमती रुखसाना के इस उद्यम की व्यापारिक स्थिति अत्यंत उत्साहजनक और सुदृढ़ है। उनके कियोस्क से प्रतिदिन लगभग 50 किलोग्राम पंगेशियस मछली के साथ-साथ भारी मात्रा में भारतीय मेजर कार्प मछलियों का विक्रय सुगमता से हो जाता है। इस निरंतर उपभोक्ता मांग और बढ़ती बिक्री के माध्यम से वे प्रतिदिन ₹07 हजार से ₹08 हजार का शानदार व्यापार कर लेती हैं। सभी प्रकार के परिचालन खर्चों, परिवहन और निवेश लागत को निकालने के बाद उन्हें प्रतिदिन लगभग ₹02 हजार से ₹03 हजार की शुद्ध आय प्राप्त होती है, जो ग्रामीण परिवेश में एक महिला के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
इस बेहतरीन और नियमित शुद्ध कमाई से श्रीमती रुखसाना न केवल अपने परिवार के सभी खर्चों, बच्चों की उच्च शिक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति अत्यंत सम्मानजनक तरीके से कर रही हैं, बल्कि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। अपने इस सफल उद्यम के माध्यम से उन्होंने स्थानीय स्तर पर अन्य 02 बेरोजगार युवाओं को भी प्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराया है, जिससे उन परिवारों के जीवन में भी आर्थिक स्थिरता आई है। उनकी मेहनत ने एक मिसाल कायम की है कि एक महिला उद्यमी किस प्रकार आत्मनिर्भर बनकर समाज के अन्य वंचित वर्गों के लिए भी संबल बन सकती है।
श्रीमती रुखसाना स्वयं गर्व से साझा करती हैं कि उनके द्वारा सृजित ये रोजगार और यह सकारात्मक आर्थिक बदलाव उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग, जिला प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के सक्रिय सहयोग, समय पर मिले मार्गदर्शन तथा निरंतर तकनीकी प्रेरणा से ही संभव हो सका है। उनकी इस सफलता ने सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक तालमेल से तो ग्रामीण क्षेत्रों में आ रही आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां आज राज्य के कोने-कोने में ऐसी हजारों आत्मनिर्भर ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान दे रही हैं, जो न केवल देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत कर रही हैं, बल्कि नीली क्रांति के सपने को भी साकार कर रही हैं।
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