आध्यात्मिक शिक्षा जीवन जीने का सही तरीका सिखाती है
- डाॅ भारती गाँधी, संस्थापिका निदेशिका, सिटी मोन्टेसरी स्कूल
लखनऊ, 29 जून। सिटी मोन्टेसरी स्कूल की संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने सी.एम.एस. प्रधान कार्यालय में आयोजित एक वैचारिक-आध्यात्मिक सत्संग सभा में बतौर मुख्य वक्ता बालते हुए अभिभावकों व शिक्षकों का आह्वान किया कि बच्चों को प्रारम्भ से ही आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करें, क्योंकि आध्यात्मिक शिक्षा जीवन जीने का सही तरीका सिखाती है। जब बच्चों में आध्यात्मिक शिक्षा द्वारा मानवीय संस्कार दिये जाते हैं तो वह अपने भौतिक कर्तव्यों के साथ आध्यात्मिक कर्तव्यों का भी पालन करता है और समाज में सुख व शान्ति की स्थापना संभव हो पाती है। इस सत्संग सभा में श्री राबर्ट गांधी एवं श्री महेश अग्रवाल समेत 75 से अधिक विभिन्न धर्मों के अनुयाइयों ने प्रतिभाग किया।
सत्संग सभा में आगे बोलते हुए डा. भारती गाँधी ने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। आध्यात्मिकता द्वारा मनुष्य को आपस में प्रेम से रहना, लोगों की मदद करना, भेदभाव ना करना सिखाया जा सकता है। आज सारे विश्व में जो लड़ाई हो रही हैं उसका केवल एक कारण है आध्यात्मिक शिक्षा का आभाव। आज जब विश्व सरकार बने और विश्व में भेदभाव और लैगिंक असमानता बढ रही है, तब आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा विश्व शांति की स्थापना की जा सकती है। आपसी सहयोग और भाईचारे के द्वारा से देशों के बीच हो रहे युद्धों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
डा. भारती गाँधी ने कहा कि जब मनुष्य धरती पर आया तो उसे किसी भी चीज की जानकारी नहीं थी और वह पशुओं की तरह रहता था, फिर समय बीतने के साथ वह अपनी आवश्यकता के लिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने लगा। समय के साथ, विभिन्न महापुरूषों द्वारा जीवन जीने का सही तरीका आध्यात्मिक शिक्षा द्वारा समझाया गया और उन शिक्षाओं को ईश्वर से जोड़ा ताकि मनुष्य उस पर चलकर एक सुखी जीवन बिता सके। आज बच्चे टीवी, मोबाइल आदि में इतना खोये रहते हैं कि सांसारिक व आध्यात्मिक कर्तव्यों को भूल जाते हैं। जिससे उनका जीवन कठिनाईयों एवं समस्याओं से भर जाता हैं। ऐसे में, जरूरी है कि हम भावी पीढ़ी को शुरू से ही जीवन मूल्यों, नैतिक मूल्यों व आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत जीवन पद्धति पर चलना सिखायें। सत्संग का समापन बहुत ही प्रेरणादायी गीत ‘‘आज विश्व को नये विचार चाहिए ..’’ व प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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