शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक सुधार के संकल्प के 

साथ ‘शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला’ सम्पन्न

लखनऊ, 27 जून। सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित आठ-दिवसीय ‘इन-सर्विस टीचर्स ट्रेनिंग वर्कशाॅप’ शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक सुधार के संकल्प के साथ आज सम्पन्न हो गई। ‘इन-सर्विस टीचर्स ट्रेनिंग वर्कशाॅप’ के अन्तर्गत सी.एम.एस. राजाजीपुरम प्रथम कैम्पस, गोमती नगर प्रथम कैम्पस, गोमती नगर एक्सटेंशन कैम्पस एवं कानपुर रोड कैम्पस के सभागारों में विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित की गई, जिनमें सी.एम.एस. के प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, जूनियर व सीनियर सेक्शन के 2000 से अधिक शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। खास बात रही कि इन कार्यशालाओं के अन्तर्गत प्रिवेन्शन आॅफ सेक्सुअल हैरेसमेन्ट (पोश), प्रिवेन्शन आॅफ चिन्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेन्स एक्ट (पाक्सो), कार्पोरल पनिशमेन्ट एवं रिस्टोरेटिव जस्टिस आदि विभिन्न विषयों पर सारगर्भित चर्चा एवं जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ। विदित हो कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा अपने कर्मठ एवं कर्तव्यनिष्ठ शिक्षकों के ‘निरन्तर कौशल विकास’ कार्यक्रम के अन्तर्गत आठ-दिवसीय ‘इन-सर्विस टीचर्स ट्रेनिंग वर्कशाॅप’ का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को शैक्षिक मानदंडो से अवगत कराने के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास तथा अभिनव प्रयोगों से परिचित कराना था।

इन-सर्विस टीचर्स ट्रेनिंग वर्कशाॅप के अन्तिम दिन आज सी.एम.एस. राजाजीपुरम प्रथम कैम्पस के सभागार में ‘ए.आई प्राम्प्ट इंजीनियरिंग’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सी.एम.एस. के विभिन्न कैम्पसों के 200 से अधिक शिक्षकों ने प्रतिभाग कर आर्टिफिशिअल इंटेलीजेन्स (ए.आई.) के विविध पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।  इस कार्यशाला का संचालन श्री शोभित कंचन ने किया। इसी प्रकार, 

सी.एम.एस. गोमती नगर प्रथम कैम्पस आॅडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला में सी.एम.एस. के कला एवं संगीत शिक्षकों ने प्रतिभाग किया जबकि सी.एम.एस. गोमती नगर एक्सटेंशन कैम्पस आॅडिटोरियम में बायो-टेक्नोलाॅजी विषय पर कार्यशाला आयोजित हुई।

सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन अवसर पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि बीते आठ दिनों में आयोजित ये प्रशिक्षण कार्यशालाएं अत्यन्त सफल रही है, जिसमें शिक्षकों ने बहुत सी नई बातें सीखी हैं और विचारों के आदान-प्रदान ने शिक्षा पद्धति को एक नई दिशा दी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्री-प्राइमरी व प्राइमरी शिक्षा का समय ही वह सबसे अच्छा समय है जब बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव रखी जाती है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि शिक्षक बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही न दें अपितु उनमें मानवीय मूल्यों एवं नैतिकता के विचारों का समावेश भी करें।