विश्व क्षुद्रग्रह दिवस पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने जगाई अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति वैज्ञानिक चेतना’
इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में विशेषज्ञों ने साझा किए क्षुद्रग्रहों, उल्कापिंडों और ग्रह सुरक्षा से जुड़े वैज्ञानिक तथ्य
विद्यार्थियों ने देखा वास्तविक उल्कापिंड, सूर्य का किया सुरक्षित अवलोकन और खगोल विज्ञान प्रश्नोत्तरी में दिखाई प्रतिभा
लखनऊ: 30 जून, 2026
उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ एवं यू.पी. एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब (यूपीएएसी) के संयुक्त तत्वावधान में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व क्षुद्रग्रह दिवस के अवसर पर एक दिवसीय वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों में क्षुद्रग्रहों, नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स, उल्कापिंडों, ग्रह सुरक्षा और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति वैज्ञानिक सोच विकसित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, विज्ञान प्रेमियों एवं खगोल विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ के एस्ट्रोफिजिसिस्ट डॉ. शंकर दयाल पाठक ने क्षुद्रग्रहों की उत्पत्ति, उनके प्रकार, मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी, नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स तथा ग्रह सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 4.6 अरब वर्ष पुराने क्षुद्रग्रह सौरमंडल के निर्माण के अवशेष हैं और उनका अध्ययन पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति, सौरमंडल के विकास तथा मानव सभ्यता की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नासा के डार्ट मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि वैज्ञानिक संभावित क्षुद्रग्रहीय खतरों से पृथ्वी की सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ. अमृतांशु वाजपेयी, नेशनल कन्वीनर, सप्तऋषि इंडिया एस्टेरॉयड सर्च कैम्पेन ने उल्कापिंडों के वैज्ञानिक महत्व, भारत में उनके अध्ययन, लोनार क्रेटर तथा अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह खोज अभियानों पर रोचक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन (आईएएससी) के माध्यम से विद्यार्थी एवं नागरिक वैज्ञानिक वास्तविक खगोलीय आंकड़ों का विश्लेषण कर नए क्षुद्रग्रहों की खोज में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने अपने नाम दर्ज एक दर्जन से अधिक संभावित क्षुद्रग्रह खोजों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण तब रहा जब इसरो के इस्ट्रैक से जुड़े वैज्ञानिक श्री राजीव कुमार ने प्रतिभागियों को एनडब्ल्यूए 17418 डायोजेनाइट उल्कापिंड का वास्तविक नमूना दिखाया। उन्होंने बताया कि यह दुर्लभ उल्कापिंड क्षुद्रग्रह वेस्टा की पर्पटी से संबंधित माना जाता है और इसमें सौरमंडल के निर्माण तथा ग्रहों के विकास से जुड़े करोड़ों वर्ष पुराने वैज्ञानिक रहस्य सुरक्षित हैं। विद्यार्थियों ने इस दुर्लभ नमूने को उत्साहपूर्वक देखा और उससे संबंधित अनेक वैज्ञानिक जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित खगोल विज्ञान प्रश्नोत्तरी में विद्यालय वर्ग में अंशिका वर्मा ने प्रथम, जोया नाज़ ने द्वितीय तथा अंजली गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं महाविद्यालय वर्ग में गरिमा सिंह प्रथम, सोमिल यादव द्वितीय तथा वैभवी सिंह तृतीय स्थान पर रहीं। सभी विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विशेष सूर्य अवलोकन सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सुरक्षित सौर दूरबीनों और विशेष सौर फिल्टरों की सहायता से सूर्य का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा उसकी सतह से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। विशेषज्ञों के साथ आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने इसरो के मिशनों, क्षुद्रग्रह खोज, ग्रह सुरक्षा तथा खगोल विज्ञान में करियर से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से उत्तर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विश्व क्षुद्रग्रह दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं, बल्कि समाज में वैज्ञानिक चेतना विकसित करने, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सिटीजन साइंस की भावना को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिवस 30 जून 1908 को साइबेरिया के टूंगूस्का क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक क्षुद्रग्रहीय घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष मनाया जाता है, ताकि आमजन को नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स एवं क्षुद्रग्रहों के अध्ययन के महत्व से अवगत कराया जा सके।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ एवं यू.पी. एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब के सदस्यों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान प्रेमियों ने कार्यक्रम को अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने वाला बताया।

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