Physics का खंड रहा कठिन : मनीष सिंह
उन्होंने बताया कि भौतिकी का खंड अपेक्षाकृत कठिन रहा, जिसमें लगभग 28 प्रश्न विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण सिद्ध हुए। वहीं रसायन विज्ञान के ऑर्गेनिक एवं फिजिकल भाग में कई प्रश्न गणनात्मक प्रकृति के होने के कारण विद्यार्थियों को अधिक सावधानी और स्पष्ट अवधारणात्मक समझ की आवश्यकता पड़ी।
बॉटनी एवं जूलॉजी के प्रश्न रहे सरल
श्री मनीष सिंह ने आगे कहा कि बॉटनी एवं जूलॉजी के प्रश्न तुलनात्मक रूप से सरल रहे, जिससे विद्यार्थियों को इन विषयों में बेहतर अंक प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रवेश व्यवस्था के संदर्भ में उन्होंने बताया कि भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की लगभग 60,000 सीटें उपलब्ध हैं, जिनमें से 15 प्रतिशत सीटों पर केंद्रीय काउंसलिंग तथा 85 प्रतिशत सीटों पर राज्य काउंसलिंग के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है।
परीक्षा के स्तर एवं उपलब्ध सरकारी मेडिकल सीटों के आधार पर उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हेतु लगभग 505 अंक एक महत्वपूर्ण मानक के रूप में उभर सकते हैं।
श्री सिंह ने कहा कि इस प्रकार का विश्लेषण विद्यार्थियों को परीक्षा के स्तर, संभावित अंक प्रवृत्ति तथा काउंसलिंग प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में सहायता प्रदान करता है, जिससे वे आगे की तैयारी और निर्णय अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकें।


0 टिप्पणियाँ
If you have any doubts, please let me know