राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत जनसूचना अधिकारी पर अर्थदण्ड अधिरोपित
लखनऊ: 14 जुलाई, 2026
सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अंतर्गत दायर एक द्वितीय अपील में राज्य सूचना आयोग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा पारित आदेश में जनसूचना अधिकारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अलीगढ़ पर सूचना उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलम्ब, सूचना के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने तथा आयोग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिसों के बावजूद संतोषजनक उत्तर एवं व्यक्तिगत उपस्थिति न देने के कारण अधिनियम की धारा-20(1) के अंतर्गत ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है।
प्रकरण में अपीलकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपने आवेदन के संबंध में जांच अधिकारी का नाम, पदनाम, जांच की प्रति एवं जांच रिपोर्ट की सूचना मांगी गई थी। समयावधि में सूचना उपलब्ध न कराए जाने पर प्रथम अपील तथा उसके उपरांत राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई।
राज्य सूचना आयोग द्वारा प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी जनसूचना अधिकारी को विभिन्न तिथियों पर नोटिस एवं कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, किन्तु उनके द्वारा न तो संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत किया गया और न ही आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा गया। आयोग ने इसे सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए जनसूचना अधिकारी का आचरण दायित्वों के प्रतिकूल पाया।
आयोग ने अपने आदेश दिनांक 10 जुलाई 2026 में जनसूचना अधिकारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अलीगढ़ श्री प्रमोद कुमार के वेतन से ₹25,000 (पच्चीस हजार रुपये) की अर्थदण्ड राशि वसूल किए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आदेश की प्रति जिलाधिकारी, अलीगढ़ एवं राज्य सूचना आयोग के संबंधित अभिलेखों हेतु प्रेषित किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जनसूचना अधिकारियों का यह वैधानिक दायित्व है कि वे निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध कराएं तथा आयोग के समक्ष लंबित मामलों में समय पर उत्तर एवं सहयोग सुनिश्चित करें। आदेश के साथ ही अपीलीय प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया है।

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