राजस्व परिषद की महत्वपूर्ण पहल आरक्षित एवं शासकीय भूमि से जुड़े वादों की सुनवाई अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी’


राजस्व परिषदए उत्तर प्रदेश ने आरक्षित श्रेणी की भूमिए शासकीय भूमिए ग्राम सभाए नजूल निष्क्रांत संपत्ति एवं शत्रु संपत्ति ययदि कोई हो, से संबंधित वादों के त्वरितए पारदर्शी एवं एकरूप निस्तारण के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा.9 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन श्रेणी के वादों की सुनवाई अब ’तीन सदस्यीय विशेष पीठ य (Three Member Bench)’ द्वारा किए जाने की व्यवस्था लागू कर दी गई है।

’राजस्व परिषद की माननीय अध्यक्ष श्रीमती अर्चना अग्रवाल के निर्देशों के अनुपालन में’ यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। इसके अंतर्गत ’लखनऊ एवं प्रयागराज’ स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में आरक्षित श्रेणी की भूमि शासकीय भूमि ग्राम सभाए नजूल निष्क्रांत संपत्ति एवं शत्रु संपत्ति यदि कोई हो से संबंधित सभी विचाराधीन एवं नवीन वाद अब संबंधित ’तीन सदस्यीय विशेष पीठ’ के समक्ष सुनवाई हेतु प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार उपर्युक्त श्रेणी के वादों की सुनवाई अब परिषद की ’एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट’ द्वारा नहीं की जाएगी। इन मामलों का निस्तारण विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ द्वारा किया जाएगाए जिससे महत्वपूर्ण प्रकृति के मामलों में सामूहिक न्यायिक विचार.विमर्श सुनिश्चित होगा तथा निर्णय प्रक्रिया और अधिक सुदृढ़ए पारदर्शी, निष्पक्ष एवं न्यायसंगत बन सकेगी।

विभाग ने लखनऊ एवं प्रयागराज दोनों न्यायालयों के लिए पृथक.पृथक ’तीन सदस्यीय विशेष पीठों’ का गठन किया है। यह विशेष पीठ प्रत्येक ’बुधवार’ को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई करेगी। इससे सार्वजनिक महत्व एवं सरकारी भूमि से जुड़े संवेदनशील वादों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा तथा न्यायिक प्रक्रिया में एकरूपता भी स्थापित होगी। विभाग द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नवीन वादों को चिन्हित कर निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाएए ताकि नई व्यवस्था का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

 यह व्यवस्था सार्वजनिक एवं शासकीय भूमि से जुड़े वादों के निस्तारण में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं न्यायिक गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ करेगी। साथ ही महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मामलों में विशेषज्ञतापूर्ण सामूहिक निर्णय की व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावीए विश्वसनीय एवं एकरूप बनेगी। यह पहल राजस्व न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण एवं न्याय वितरण प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।