हाईकोर्ट ने मोनिश व शाहबाज की गिरफ्तारी से बचने की याचिका खारिज की
जानलेवा हमले के मामले में मोनिश व शाहबाज के खिलाफ दर्ज है मुकदमा
लखनऊ। उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ की रजनीश कुमार व बबीतारानी की कोर्ट ने विरामखण्ड गोमतीनगर में जानलेवा हमले के इरादे से घुसे नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी से बचने के लिये दाखिल की गयी अलग-अलग याचिकाओं संख्या- सीएलआरपी 6683/2026 एवं 6690/2026 खारिज कर दी। मालूम हो बीते 21 व 22 जून की रात को चार लोग पीड़िता के आवास में खिड़की तोड़कर घर में जानलेवा हमले की नीयत से घुस आये और दरवाजा तोड़ने लगे जिस पर विधवा पीड़िता और साथ में रह रही जेठानी की नींद टूट गयी और घबराकर चिल्लाने लगे जिस पर घर में घुसे लोग अपने साथ लाये सामान छोड़ कर भाग गये, जिसकी जानकारी तत्काल पुलिस को दी, मौके पर पहंुची पुलिस को तीन दस्ताने, लोहे की राड, गमछा, नकली चाभियां आदि संदिग्ध सामान बरामद कर अपने साथ ले गयी। मामले की रिपोर्ट मोनिश हसन, शाहबाज सहित दो अन्य अज्ञात के खिलाफ थाना गोमतीनगर में एफआईआर संख्या 0268 दर्ज करायी। जिसमें नामजद आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिये उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ की शरण ली, जहां आरोपियों की गिरफ्तारी से बचने के लिये दाखिल की गयी याचिका को सुनवाई के खारिज कर दिया। उधर याचिका खारिज होने पर पीड़िता के अधिवक्ता गोपाल कृष्ण दीक्षित ने कहा कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी करने से बच रही है, और अगर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पीड़िता और उनके साथ रह रही जेठानी सहित नाबालिग बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।
ज्ञातव्य हो कि बीते सात जुलाई को लव एवं लैण्ड जिहाद की आड़ में सुनियोजित षड़यंत्र कर हिन्दू परिवार को बरबादी के कगार पर पहुंचाने का आरोप लगाते हुये पीड़िताओं ने पत्रकार वार्ता में अपना दर्द बयां किया था और मोनीश सहित अन्य दोषियों के खिलाफ एक अन्य मुकदमा दर्ज कर कानूनी काररवाई की मांग की थी। पीड़िताओं ने दोषियों के खिलाफ 6 जुलाई को आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कड़ी कारवाई करने और पीड़ित हिन्दू परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर पुलिस उपायुक्त पश्चिमी को प्रार्थनापत्र दिया है। पीड़ित विधवा महिलाओं ने बताया था कि मोनिश हसन नामक युवक ने उसकी ननद शिल्पी त्रिपाठी को शातिराना तरीके फंसाकर धर्मपरिवर्तन कर न सिर्फ निकाह किया बल्कि उसके एक साल बाद परिवार में आना-जाना शुरू होने के बाद एक-एक कर पिता और दोनों भाईयों अर्थात पीड़िताओं के ससुर और पतियों की मौत हो गयी। इसके उपरान्त मोनिश ननद शिल्पी की मां को साथ लेकर अपने पास रख लिया और इस्लाम मजहब में परिवर्तित करवा लिया। इसके बाद पति की मौत के 19 दिन बाद ही पीड़िता की बेटी को बंधक और पीड़िता के मोबाइल लेकर उसके निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर समस्त प्रापर्टी शिल्पी के नाम गिफ्ट डीड करवा ली। जिससे पूरा परिवार बरबादी के कगार पर पहुंच गया है।


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