मुख्यमंत्री ने जनपद बुलन्दशहर में श्रद्धेय रज्जू भैया सैनिक विद्या मन्दिर में आयोजित स्वागत कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित किया

स्वयं के हित से महत्वपूर्ण देश का हित, अपने हितों की तिलांजलि देकर के देश के हित को स्वीकार करना सैनिकों का प्रथम लक्ष्य, इसी सोच के साथ वह देश की रक्षा करते : मुख्यमंत्री
 
रज्जू भैया सैनिक विद्या मन्दिर में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए विषय तथा आत्मअनुशासन अत्यन्त महत्वपूर्ण, उज्ज्वल भविष्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा

आने वाले समय में यह सैनिक विद्या मन्दिर देश की रक्षा सेनाओं के लिए सैन्य अधिकारियों की आपूर्ति करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा

आने वाले समय में रज्जू भैया के नाम पर स्थापित इस सैनिक विद्या मन्दिर में बेटियां भी प्रवेश लेंगी

गुलामी की मानसिकता से दुनिया का कोई भी देश या समाज आगे नहीं बढ़ सकता, अपने मूल्यों और आदर्शों पर चलकर ही कोई देश या समाज आगे बढ़ता

प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूर्वजों, ऋषि-मुनियों, तीर्थों तथा पवित्र ग्रन्थों की विरासत पर गौरव की अनुभूति करना चाहिए

हमें अपनी सेना तथा वर्दीधारी फोर्स के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए, हम इसलिए सुरक्षित, क्योंकि जवान दिन-रात सर्दी, गर्मी तथा बरसात में सीमा की सुरक्षा कर रहे


लखनऊ : 18 जुलाई, 2026 : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि सैनिक स्कूल हमारा ध्यान अनुशासित और संस्कारित वातावरण की ओर आकर्षित करता है। स्वयं के हित से महत्वपूर्ण देश का हित है। अपने हितों की तिलांजलि देकर के देश के हित को स्वीकार करना सैनिकों का प्रथम लक्ष्य होता है। इसी सोच के साथ वह देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों को बलिदान करते हैं। एक सैनिक के लिए देश पहले होता है, परिवार बाद में होता है, तभी वह माइनस 20 तथा  माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में देश की सुरक्षा कर पाता है।
मुख्यमंत्री आज जनपद बुलन्दशहर में श्रद्धेय रज्जू भैया सैनिक विद्या मन्दिर में आयोजित स्वागत कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने श्रद्धेय रज्जू भैया को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि रज्जू भैया सैनिक विद्या मन्दिर में जो विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, उनके लिए विषय तथा आत्मअनुशासन अत्यन्त महत्वपूर्ण है, क्योंकि उज्ज्वल भविष्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। इस सैनिक विद्या मन्दिर के साथ एक ऐसा नाम जुड़ा हुआ है, जो हम सभी के लिए स्वयं में प्रेरणा के स्रोत हैं।
श्रद्धेय रज्जू भैया प्रख्यात वैज्ञानिक तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिजिक्स के प्रोफेसर रहे। उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सर संघ चालक के रूप में लाखों स्वयंसेवकों को नेतृत्व प्रदान किया था। अनेक प्रकल्पों पर कार्य प्रारम्भ करते हुए, हमें नई दिशा प्रदान की। उनके मुंह से निकला हुआ शब्द ऐसा लगता था, जैसे उनके मुंह से कोई पुष्प निकल रहा हो। उनके मन में प्रत्येक व्यक्ति के लिए सदैव सहानुभूति का भाव रहता था। आने वाले समय में यह सैनिक विद्या मन्दिर देश की रक्षा सेनाओं के लिए सैन्य अधिकारियों की आपूर्ति करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें पूज्य रज्जू भैया के नाम पर प्रयागराज में विश्वविद्यालय बनाने का अवसर प्राप्त हुआ। आज रज्जू भैया के नाम पर यह प्रतिष्ठान यहां संचालित हो रहा है। विद्यार्थियों को भारत और भारतीयता से जोड़कर सनातन मूल्यों की रक्षा करने के लिए सदैव तत्पर रहना होगा। देश का पहला सैनिक स्कूल वर्ष 1960 में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थापित किया था। उस समय डॉक्टर सम्पूर्णानन्द जी प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। हम लोगों ने उस विद्यालय को बहुत अच्छे ढंग से आगे बढ़ाया। पहले वहां बालिकाओं का प्रवेश नहीं होता था, हमारी पहल पर उस सैनिक स्कूल में बालिकाओं का प्रवेश प्रारम्भ हुआ था।
मुख्मयंत्री जी ने कहा कि आने वाले समय में रज्जू भैया के नाम पर स्थापित इस सैनिक विद्या मन्दिर में बेटियां भी प्रवेश लेंगी। हमारी हार्दिक इच्छा है कि हम लोग यहां बालिकाओं के लिए जो छात्रावास बनाएं, वह रज्जू भैया की माताजी के नाम पर स्थापित हों। रज्जू भैया के पिताजी सिंचाई विभाग में चीफ इन्जीनियर थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंचाई का अच्छा नेटवर्क होने में रज्जू भैया के पूज्य पिता का योगदान है। इसलिए वह कार्यक्रम भी हम लोग यहां पर आगे बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान ने बुलन्दशहर में सैनिक स्कूल की स्थापना कर यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि देश में निजी ट्रस्ट भी सैनिक स्कूल प्रारम्भ कर सकते हैं। बुलन्दशहर देश में  सर्वाधिक सैनिक और सैन्य अधिकारी देने वाला जनपद है। इसलिए यहां पर सैनिक स्कूल की स्थापना महत्वपूर्ण हो जाती है। बाबा राजपाल सिंह जी ने अपनी 32 बीघा भूमि इस सैनिक स्कूल को भेंट की है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में देशवासियों से कहा था कि आजादी के शताब्दी महोत्सव की तैयारी अभी से प्रारम्भ करनी होगी। जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होंगे, तब हमें विकसित भारत चाहिए। हमें इस संकल्प के अनुरूप आचरण करना होगा। इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने देशवासियों को पंचप्रण का मंत्र दिया था। यह प्रंच प्रण प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक हैं। इनमें पहला प्रण गुलामी की मानसिकता को त्यागना है। जब तक गुलामी की मानसिकता बनी रहेगी, तब तक दुनिया में कोई भी देश या समाज आगे नहीं बढ़ सकता। अपने मूल्यों और आदर्शों पर चलकर ही कोई देश या समाज आगे बढ़ता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि दूसरा प्रण अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करना है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूर्वजों, ऋषि-मुनियों, तीर्थों तथा पवित्र ग्रन्थों की विरासत पर गौरव की अनुभूति करना चाहिए। हम विरासत के संरक्षण व संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास करें। ऐसा कौन सा भारतीय होगा जिसने अयोध्या में प्रभु श्रीराम मन्दिर निर्माण तथा काशी विश्वनाथ धाम मन्दिर जैसे कार्यों पर गौरव की अनुभूति न की हो। तीसरे प्रण के अन्तर्गत सामाजिक समता का ध्यान रखना तथा सबको जोड़ना सम्मिलित है। जिन बुराइयां, छुआछूत, अस्पृश्यता आदि कुप्रथाओं के कारण यह देश गुलाम हुआ, जाति, क्षेत्र व भाषा के नाम पर बंटा, हम सभी को उनसे उबर कर कार्य करना है।
चौथे प्रण के अन्तर्गत अपनी सेना, यूनिफार्म धारी फोर्स के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव सम्मिलित है। हम इसलिए सुरक्षित हैं, क्योंकि हमारे जवान दिन-रात सर्दी, गर्मी तथा बरसात में सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं। पुलिस के जवान दिन-रात मेहनत करते हुए आन्तरिक सुरक्षा में लगे हैं। हमें क्रान्तिकारियों, शहीद सैनिकों तथा उनके परिजनों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव रखना होगा। जब हम ऐसा करेंगे, तभी युवा सेना में आने को प्रोत्साहित होंगे। पांचवें प्रण के अन्तर्गत नागरिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है। प्रत्येक व्यक्ति अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को लेकर आगे बढ़ता है। नागरिक कर्तव्यों के अन्तर्गत विद्यार्थी अनुशासित रहते हुए अपनी शिक्षा अर्जित करते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को अनुशासित और संस्कारित करते हुए पाठ्यक्रम को ससमय पूरा करता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एक व्यापारी द्वारा ईमानदारी के साथ अपना व्यापार करते हुए सामान्य उपभोक्ता का शोषण न करना, समय पर कर अदा करना, कालाबाजारी का विरोध करना उसकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन है। यदि कोई किसान सर्दी, गर्मी और बरसात की चिन्ता किये बगैर ईमानदारी के साथ अपने कृषि कार्य को सम्पन्न कर रहा है, देश के नागरिकों का पेट भरने का काम कर रहा है, तो वह किसान देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा है। यही बात अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों पर लागू होती है। जब लोग अपने अधिकारों से महत्वपूर्ण कर्तव्यों को मानते हैं, तभी देश आगे बढ़ता है तथा विकसित होता है। यही आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आधारशिला है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें विगत दिनों जापान और उसकी टेक्नोलॉजी को देखने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ। यदि आत्मअनुशासन का सही उदाहरण देखना है, तो जापान जाकर देखें। आत्मअनुशासन किसी भी समाज या देश की प्रगति का आधार बनता है। जापान सन् 1945 में पूरी तरह तबाह हो गया था। पहली बार दुनिया में सन् 1945 में परमाणु बम का प्रयोग हुआ था। जापान के दो महत्वपूर्ण शहर परमाणु बम की चपेट में आए, जिससे लाखों लोग मारे गए थे। उस समय जापान आर्थिक व मनोबल की दृष्ट से टूट सा गया था। आज जापान दुनिया की एक विकसित अर्थव्यवस्था के रूप में काम कर रहा है। भारत सन् 1947 में स्वतंत्र हुआ। विगत 12 वर्षों में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में देश ने अभिनन्दनीय प्रगति की है। भारत आज दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।