फिरोजाबाद में ‘उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना‘ ने संवारा श्रमिक परिवारों का भविष्य
दिनांक: 08 जुलाई ,2026
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के आर्थिक और भौतिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले निर्माण श्रमिकों के हितों की रक्षा और उन्हें एक सुदृढ़ सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से ‘उत्तर प्रदेश निर्माण कामगार मृत्यु व दिव्यांगता सहायता योजना‘ का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे के निर्माण में दिन-रात पसीना बहाने वाले ये पंजीकृत श्रमिक अक्सर कार्यस्थलों पर अप्रत्याशित जोखिमों और दुर्घटनाओं के साये में काम करते हैं। ऐसे में, यदि किसी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के कारण श्रमिक की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उस परिवार की आजीविका छिन जाती है।
इसी विषम परिस्थिति को भांपते हुए प्रदेश सरकार ने इस अत्यंत कल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारा है, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में पीड़ित परिवार को तत्काल और पर्याप्त आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके। यह योजना प्रदेश सरकार की उस संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने और संकट के समय उसे सम्मानजनक जीवन का संबल देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
शासन की जन कल्याणकारी नीतियां जब प्रशासन की त्वरित कार्यप्रणाली से जुड़ती हैं, तो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक समृद्धि और संतोष स्वतः पहुंच जाता है और शासन का उद्देश्य भी अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर लेता है। इसी कड़ी में जनपद फिरोजाबाद में शासन के निर्देशानुसार समाज के सबसे कर्मठ और श्रम साधक वर्ग निर्माण श्रमिकों के आश्रितों को पूर्ण सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना के अंतर्गत आपदा या दुर्घटना के शिकार हुए निर्माण श्रमिकों के पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए प्रशासन द्वारा एक अत्यंत संवेदनशील मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित कदम उठाए गए हैं।
जनपद फिरोजाबाद में हाल ही में दुर्घटना के शिकार हुए दस निर्माण श्रमिकों के आश्रित परिवारों को आपदा की इस घड़ी में बहुत बड़ा संबल प्रदान किया गया है। प्रशासन की त्वरित तत्परता के चलते इन सभी परिवारों के लिए कुल 52 लाख 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गयी है, जिसे सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित किये जाने की प्रक्रिया अपनायी गयी है। शासन द्वारा इस योजना को बेहद पारदर्शी और सुलभ बनाया गया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (न्च्ठव्ब्ॅ) में पंजीकृत श्रमिकों के साथ-साथ मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत श्रमिक भी इस सुरक्षा चक्र का सीधा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के परिवारों को वित्तीय संकट से उबारने के लिए यह योजना संकट की घड़ी में एक वास्तविक हमसफर की भूमिका निभा रही है।
इस योजना के वित्तीय प्रावधानों के तहत कार्यस्थल पर या दुर्घटना के फलस्वरूप मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही, पीड़ित परिवार को 25 हजार रुपये की धनराशि अलग से अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) हेतु प्रदान की जाती है। इस प्रकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल 5 लाख 25 हजार रुपये की सम्मानजनक धनराशि प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई कामगार किसी दुर्घटना के चलते आंशिक या पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे उसकी दिव्यांगता की प्रकृति के अनुसार आर्थिक अनुदान दिया जाता है, जिससे वह अपनी चिकित्सा और दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हो सके।
योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्यंत सुरक्षित और पारदर्शी भुगतान प्रणाली है। स्वीकृत की गयी सम्पूर्ण धनराशि का सीधे उपयोग न करके प्रशासन द्वारा इसे श्रमिक के परिवार के नाम फिक्स्ड डिपॉजिट (थ्क्) करा दिया जाता है। सरकार द्वारा किया गया यह विशेष प्रावधान इसलिए है ताकि कोई भी बिचौलिया या दलाल सीधे-साधे गरीब परिवारों के पैसों का गबन न कर सके और सहायता का शत-प्रतिशत लाभ सीधे लाभार्थी तक पहुंचे। इस योजना के तहत आश्रित परिवारों को इस फिक्स्ड डिपॉजिट की राशि से अगले आठ वर्षों तक प्रतिमाह लगभग 11 हजार रुपये की नियमित मासिक आय प्राप्त होती है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से चल सके।
सरकार की इस योजना के पीछे मुख्य मंशा यह है कि भले ही हादसे के कारण परिवार ने अपने महत्वपूर्ण कमाऊ सदस्य को खो दिया हो, परंतु आर्थिक तंगी के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य प्रभावित न हो। प्रशासन द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर इतना सरल और उत्तरदायी बना दिया गया है कि पीड़ित परिवारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और सहायता राशि बिना किसी बाधा के सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित हो जाती है। इस समयबद्ध आर्थिक मदद से न केवल आश्रितों को मानसिक और सामाजिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि बच्चों की शिक्षा और परिवार के जीवन की निरंतरता भी भंग नहीं होती।
जनपद फिरोजाबाद में शासन के मानवीय दृष्टिकोण से लाभान्वित होने वाले श्रमिकों के परिजनों में सरिता पत्नी स्व० राकेश कुमार, गुढढी देवी पत्नी स्व० अखैई राम, दानवती पत्नी स्व० राजेश, ओमवती पत्नी स्व० प्रमोद कुमार, विनीता देवी पत्नी स्व० कर्मवीर सिंह, शिखा पत्नी स्व० सत्यप्रकाश, हेमलता पत्नी स्व० सुभाष चन्द्र, गुढढी देवी पत्नी स्व० ज्ञान सिंह, और गीता देवी पत्नी स्व० जगदीश प्रसाद शामिल हैं। इसके साथ ही, शकुन्तला देवी पत्नी स्व० रवीकांत जो कि मनरेगा जॉब कार्ड धारक श्रमिक हैं, उन्हें भी इस योजना के अंतर्गत पूर्ण लाभ प्रदान कर सुरक्षित किया गया है। इन सभी परिवारों को त्वरित गति से लाभ मिलने से इन्हें कमजोर आर्थिक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
स्थानीय प्रशासन का स्पष्ट मत है कि मानवीय दृष्टि से सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ त्वरित गति से पात्रों को प्रदान किया जाता रहेगा, जिससे उनके परिवार को कमजोर आर्थिक स्थिति का सामना न करना पड़े और उनके बच्चे और परिवार की जिंदगी सुचारू रूप से संचालित होती रहे। संक्षेप में कहा जाए तो, उत्तर प्रदेश सरकार की यह दूरदर्शी पहल न केवल श्रमिकों के श्रम का सम्मान करती है, बल्कि एक कल्याणकारी राज्य की उस अवधारणा को पूरी तरह चरितार्थ करती है, जहां हर नागरिक का जीवन और उसका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण है।

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