हिन्दूवादी संगठन लव एण्ड लैण्ड जिहाद मामले में सड़कों पर उतरेगें


आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्यवाही न हुई, तो होगा प्रदर्शन


लखनऊ। शहर में बड़े ही सुनियोजित षड़यंत्र के साथ हिन्दू परिवार को लव एण्ड लैण्ड जिहाद की आग में झोंककर बरबाद करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग को लेकर अब कई हिन्दूवादी संगठन लामबंद होने लगे है, और जल्द ही पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कार्यवाही नहीं की गयी तो हिन्दूवादी संगठनों को सड़कों पर उतरने के लिये बाध्य होना पड़ेगा। 

अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने आज यहां इस आशय की घोषणा करते हुये बताया कि विज्ञापन जगत के प्रमुख रहे दिवंगत चन्द्र भूषण त्रिपाठी के परिवार को मोनिश हसन ने लव एण्ड लैण्ड जिहाद शिकार बनाकर बरबादी के कगार पर खड़ा कर दिया है, जिसके चलते परिवार में बची चन्द्रभूषण त्रिपाठी की दो बहुयें अपने चार नाबालिग बच्चों के साथ जान की सुरक्षा और परिवार की सम्पत्ति को हड़पने और पारिवारिक कारोबार चाणक्य एडवर्टाईजर्स के वारिसों पीड़ित बहुओं के बच्चों यानी चन्द्रभूषण त्रिपाठी पोते और पोतियों के हकों पर षडयंत्र के तहत अधिकार अधिकार जमाने वाले मोनिश हसन पर कार्यवाही की मांग कर रही है, लेकिन गोमतीनगर थाना में हमले की रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस प्रशासन मोनिश सहित सभी आरोपियों का बचाव कर रहा है। जबकि पीड़ित महिलायें निहारिका त्रिपाठी और प्रीति त्रिपाठी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से भी मिलकर न्याय की गुहार लगा चुकी है।

श्री त्रिवेदी ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाते हुये कहा है कि लव एण्ड लैण्ड जिहाद के मामले को पारिवारिक सम्पत्ति विवाद बताकर आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है, जिसे संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा क्योंकि इस मामले में जिस तरह से चन्द्र भूषण त्रिपाठी के परिवार में जो घटनाक्रम हुये है, उससे साफ है कि त्रिपाठी परिवार को लव एण्ड लैण्ड जिहाद का शिकार बनाया गया है। श्री त्रिवेदी ने कि जल्द ही इस मामले को अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा अन्य कई हिन्दूवादी संगठनों के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक आवाज पहंुचाने के लिये सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहा है। 


आखिर लव एण्ड लैण्ड जिहाद का मामला क्यों

1-वर्ष-2014 से पहले मोनिश हसन अपनी बहन इरफाना के जरिये दिवंगत चन्द्र भूषण त्रिपाठी की शिल्पी त्रिपाठी से मुलाकात होती है। 

मोनिश हसन ने मुलाकात के बाद शिल्पी त्रिपाठी को प्रेमजाल में फंसाकर उसका धर्म-परिवर्तन कर 2014 में गुपचुप निकाह कर लेता है और शिल्पी का नाम बदलकर अरशी हसन रख दिया जाता है।

निकाह के बावजूद शिल्पी लगभग तीन वर्ष तक अपने परिवार यानी पिता चन्द्रभूषण त्रिपाठी के साथ रहती रही इस बीच जब परिवार में शिल्पी की शादी की बात चलती है तो वह 2017 को घर से भाग जाती है।

बेटी के इस कदम से चन्द्रभूषण त्रिपाठी का परिवार टूट जाता है, लेकिन चन्द्रभूषण त्रिपाठी और उनके बेटों के बाहर जाने के बाद शिल्पी त्रिपाठी चोरी छुपे अपनी मां गीता त्रिपाठी से मिलकर चली जाती थी।

चन्द्रभूषण त्रिपाठी का 9 अक्टूबर 2019 को निधन होने के बाद पत्नी शिल्पी उर्फ अरशी के जरिये मोनिश अपनी सास गीता त्रिपाठी को मायाजाल में फंसाकर अपने पक्ष में करने में सफलता पायी।

चन्द्रभूषण त्रिपाठी के निधन बाद उनके दोनों पुत्रों विशाल त्रिपाठी और मनीष त्रिपाठी का भी निधन हो जाता है और उसके बाद परिवार में किसी जिम्मेदार पुरूष के न रहने के कारण मोनिश हसन अपनी सास व चन्द्रभूषण त्रिपाठी की पत्नी गीता त्रिपाठी को बहुओं विशाल व मनीष की पत्नियों के खिलाफ भड़काकर अपने पास बुला लेता है।

पत्नी शिल्पी उर्फ अरशी हसन की मां गीता त्रिपाठी को अपने घर पर लाकर उससे सम्पत्तियों की गिफ्ट डीड पत्नी शिल्पी उर्फ अरशी के नाम करवा लेता है। 

4 दिसम्बर 2025 को मनीष त्रिपाठी का निधन होने के बाद मोनिश हसन की चन्द्रभूषण त्रिपाठी के परिवार में बची पीड़ित महिलाओं प्रीति त्रिपाठी और निहारिका त्रिपाठी के प्रति प्रताड़ना बढ़ जाती है और मनीष के निधन के तुरन्त बाद दिवंगत मनीष की बेटी को बंधक बनाकर उसकी सम्पत्ति की गिफ्ट डीड सास गीता त्रिपाठी के नाम फिर गीता त्रिपाठी से शिल्पी उर्फ अरशी हसन के नाम करवायी जाती है।

सम्पत्ति हड़पने के इस कुचक्र के साथ मोनिश हसन दिवंगत चन्द्र भूषण त्रिपाठी की विज्ञापन एजेन्सी चाणक्य एजेन्सी में भी वहां के कर्मचारी समीर पाठक के साथ मिलीभगत कर कब्जा लेता है और उससे होने वाली आय चन्द्र भूषण त्रिपाठी की विधवा बहुओं प्रीति त्रिपाठी और निहारिका त्रिपाठी को न मिलकर खुद ही रख लेता है।