मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय
लखनऊ : 06 जुलाई, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद द्वारा निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :-
मुख्यमंत्री जोखिम प्रबन्धन एवं पशुधन बीमा योजना
(राज्य-योजना) के क्रियान्वयन का प्रस्ताव स्वीकृत
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत सरकार द्वारा वित्त-पोषित जोखिम प्रबन्धन एवं पशुधन बीमा योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2017-18 से किया जा रहा है। इस योजना में 10 पशुओं तक ही बीमाकरण किये जाने की सीमा निर्धारित है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित/वित्त-पोषित नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में 25 स्वदेशी गोवंश तक का उपार्जन किया जाता है, जिनका बीमाकरण कराया जाना अपरिहार्य है। नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना भारत सरकार द्वारा संचालित पशुधन बीमा योजना से आच्छादित न होने के कारण इस योजना के लाभार्थियों को भी पशुधन बीमा का लाभ नवीन योजना मुख्यमंत्री जोखिम प्रबन्धन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य-योजना) के माध्यम से सुलभ कराना प्रस्तावित है।
लघु एवं सीमान्त कृषक/पशुपालकों/डेयरी फर्म के पशुपालकों के साथ-साथ समाज के कमजोर/भूमिहीन पशुपालकों द्वारा पाले जा रहे पशुओं की किसी महामारी, दैवीय आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण अपंग/अनुपयोगी/मृत्यु होने पर पशुपालक आर्थिक रूप से दयनीय स्थिति में चला जाता है। पशुओं की उक्त वर्णित अनिश्चितता से पशुपालकों की आर्थिक रूप से होने वाली क्षति को सुरक्षित रखने हेतु पशुओं का मानवों की तरह पशुधन बीमा कराया जाना अपरिहार्य है।
पशुपालकों की आर्थिक क्षति से सुरक्षा एवं पशुओं के पोषण हेतु पशुधन बीमा योजना के अन्तर्गत पशुओं का बीमाकरण किया जाएगा। इसके फलस्वरूप पशु पालकों के आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन में अभिवृद्धि होगी। पशु मृत्यु के बाद पारदर्शी प्रक्रिया से दावे की धनराशि का सीधे लाभार्थी के खाते में भुगतान तथा पी0टी0डी0 (पूर्ण स्थाई विकलांगता) प्रकरणों में बीमित राशि की 75 प्रतिशत तक की धनराशि का दावा भुगतान बीमा कम्पनी द्वारा किया जायेगा। यह कार्यक्रम पशुओं की मृत्यु की दशा में पशु पालकों को होने वाली आर्थिक क्षति के सापेक्ष पशुधन बीमा से आर्थिक एवं पोषण सुरक्षा प्रदान करेगा। योजना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं डेयरी उन्मुख योजनाओं से आच्छादित पशुओं के बीमाकरण को प्राथमिकता दी जायेगी।
मुख्यमंत्री जोखिम प्रबन्धन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य-योजना) के अन्तर्गत विभिन्न मदों में आकलित धनराशि के सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक में शासन द्वारा 6,000 लाख रुपये का बजट प्राविधान किया गया है। उक्त प्राविधानित बजट के सापेक्ष सामान्य मद के अन्तर्गत 1,86,800 एवं एस0सी0एस0पी0 कम्पोनेन्ट के अन्तर्गत 41,550 पशुधन बीमा अर्थात कुल 2,28,350 पशुधन बीमा किया जाना आकलित है। इसमें राज्य सरकार की 85 प्रतिशत एवं लाभार्थी की 15 प्रतिशत सहभागिता के दृष्टिगत सफल क्रियान्वयन हेतु मंत्रिपरिषद द्वारा योजना की कार्य योजना एवं निहित वित्तीय उपाशय पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।
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‘उ0प्र0 स्टार्टअप नीति-2026’ निर्गत किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित
उत्तर प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को प्रोत्साहित करने तथा युवाओं के लिए नये अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ प्रस्तावित की गयी है। यह नीति प्रदेश में एक मजबूत, समावेशी और वैश्विक स्तर के स्टार्टअप ईको-सिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस नीति में स्टार्टअप्स को प्रारम्भिक चरण से लेकर विस्तार (स्केल-अप) तक आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए विभिन्न वित्तीय एवं संस्थागत प्रोत्साहनों का प्राविधान किया गया है।
नयी नीति के अन्तर्गत भरण-पोषण भत्ता 17,500 रुपये प्रतिमाह (01 वर्ष) से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रतिमाह (02 वर्ष) किया गया है। प्रोटोटाइप अनुदान 05 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये तथा सीड फण्डिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गयी है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 50 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा, पेटेन्ट एवं गुणवत्ता प्रमाणन हेतु 02 करोड़ रुपये तक प्रतिपूर्ति, 05 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रान्ट, 02 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 04 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी तथा ई0पी0एफ0 एवं ई0एस0आई0 प्रतिपूर्ति का प्राविधान भी किया गया है।
उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए डीप-टेक स्टार्टअप्स हेतु विशेष प्रोत्साहन प्रदान किये गये हैं। इनमें 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फण्डिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल तथा अनुसंधान एवं विकास (आर0 एण्ड डी0) गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक सहायता शामिल है। इससे आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस (ए0आई0), रोबोटिक्स, क्वाण्टम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी एवं अन्य उन्नत क्षेत्रों में नवाचार को नई गति मिलेगी।
राज्य सरकार द्वारा इन्क्यूबेटर्स को सशक्त बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गये हैं। इन्क्यूबेटर्स हेतु पूंजीगत अनुदान 01 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये, पूर्वांचल एवं बुन्देलखण्ड के इन्क्यूबेटर्स हेतु यह राशि 1.25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गयी है तथा परिचालन व्यय अनुदान 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष किया गया है।
इसके अतिरिक्त, उच्च प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स को नवरत्न इन्क्यूबेटर सहायता तथा इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स द्वारा जुटाई गई फण्डिंग पर प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे स्टार्टअप्स के विकास एवं निवेश आकर्षण में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकें।
सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीकी अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित नीति के अन्तर्गत राज्य में 20 नये सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जानी है। इनका फोकस आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस (ए0आई0), मशीन लर्निंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक, एग्रीटेक, रोबोटिक्स तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर होगा। इससे उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय नवाचार, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही, सेण्टर ऑफ एक्सीलेंस हेतु वित्तीय प्रोत्साहन की राशि को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
स्टार्ट-अप संस्कृति को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार बिज़नेस प्लान प्रतियोगिताएं, ग्रैण्ड चैलेंज, स्टार्ट-अप वीक, नवाचार संगोष्ठियां एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसके अलावा, राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब की स्थापना की जाएगी, जो इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेन्टरशिप तथा उन्नत प्रयोगशाला को एकीकृत मंच प्रदान करेगा।
‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ के माध्यम से राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश को नवाचार एवं उद्यमिता का अग्रणी केन्द्र बनाना, निवेश आकर्षित करना, युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित करना तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करना है। यह नीति उत्तर प्रदेश के ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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‘उ0प्र0 स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद द्वारा निगमन (इनकॉरपोरेशन) एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को प्रारम्भ करने हेतु प्राधिकार प्रदान करते हुए गवर्नेन्स ढांचा, संगठनात्मक संरचना एवं वित्त पोषण तंत्र की स्वीकृति प्रदान की गयी है। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप एवं नवाचार पहलों के क्रियान्वयन हेतु प्रस्तावित इकाई के संचालन की अनुमति देते हुए मंत्रिपरिषद द्वारा भविष्य में किसी प्रकार के परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया गया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 2030 तक प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में निरन्तर कार्य कर रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में नवाचार आधारित उद्यम, प्रौद्योगिकी संचालित स्टार्टअप्स तथा युवाओं की उद्यमशीलता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी दृष्टिकोण को साकार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक समर्पित एवं सशक्त संस्थागत व्यवस्था के रूप में ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना प्रस्तावित की गई है।
‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ का गठन आई0टी0 एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियन्त्रण में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अन्तर्गत किया जाएगा। यह मिशन राज्य में स्टार्टअप एवं नवाचार सम्बन्धी गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु नोडल संस्था के रूप में कार्य करेगा।
मिशन का उद्देश्य प्रदेश में उद्यमिता एवं नवाचार को बढ़ावा देना, स्टार्टअप्स की स्थापना एवं विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा राज्य के सभी क्षेत्रों में नवाचार आधारित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है। मिशन के माध्यम से स्टार्टअप ईको-सिस्टम को समृद्ध, इन्क्यूबेटर एवं नवाचार केन्द्रों का विकास, डीप-टेक ईको-सिस्टम को बढ़ावा देने हेतु मेंटरशिप एवं एक्सेलरेशन कार्यक्रमों का संचालन तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा स्टार्टअप ईको-सिस्टम को सुदृढ़ किया जाएगा।
‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ द्वारा निवेशकों, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों, इन्क्यूबेटर्स एवं स्टार्टअप्स के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। अनुदान, प्रोत्साहन एवं अन्य सहायता योजनाओं का पारदर्शी एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, कार्यक्रमों की निगरानी, मूल्यांकन एवं प्रभाव आकलन के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया जाएगा।
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‘उ0प्र0 डाटा सेण्टर नीति-2026’ निर्गत किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
चूंकि ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022)’ 27 जनवरी, 2026 को कालातीत हो गई है, अतः प्रदेश शासन द्वारा नई डाटा सेण्टर नीति का प्रख्यापन प्रस्तावित है। ‘उत्तर प्रदेश डाटा सेण्टर नीति-2026’ का उद्देश्य राज्य को ग्रीन, ए0आई0 रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डाटा सेण्टर हब के रूप में स्थापित करना है। यह नीति आधुनिक तकनीकों (जैसे ळच्न् आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर), ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर आधारित है तथा एक मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहित करती है।
यह नीति उत्तर प्रदेश में डाटा सेण्टर उद्योग को बढ़ावा देकर 02 गीगावॉट से अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखती है। साथ ही, राज्य के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 02 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने का उद्देश्य है।
‘उ0प्र0 डाटा सेण्टर नीति-2026’ के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड तथा पूर्वांचल क्षेत्रों हेतु अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। नीति के अन्तर्गत टियर/रेटिंग प्प्प् तथा टियर/रेटिंग प्ट प्रोत्साहन बूस्टर, ए0आई0 कम्प्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन के लिए बूस्टर प्रोत्साहन के रूप में नवीन प्रोत्साहन सम्मिलित किए गए हैं।
इस नीति के कार्यान्वयन से राज्य में एक विश्वस्तरीय डाटा सेण्टर ईकोसिस्टम का निर्माण होगा तथा डाटा सेण्टर उद्योग विकसित किया जा सकेगा। डाटा सेण्टर इकाइयों के आस-पास बड़ी संख्या में सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी जनित इकाइयों की स्थापना हो जाती है, जिनमें प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजित होते हैं। प्रस्तावित नीति से प्रदेश में सम्भावित डाटा सेण्टर पार्क्स तथा डाटा सेण्टर इकाइयों की स्थापना के माध्यम से 7,500 व्यक्तियों हेतु दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार तथा निर्माण अवधि में लगभग 50,000 व्यक्तियों हेतु अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की सम्भावना है, जिससे जन-सामान्य का सामाजिक-आर्थिक उत्थान होगा।
प्रस्तावित नीति अधिसूचना की तिथि से 05 वर्ष तक अथवा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोई नई नीति/संशोधन किए जाने तक, जो भी पहले हो तक वैध होगी। नीति का कार्यान्वयन, शासन स्तर पर गठित नीति कार्यान्वयन इकाई की देखरेख में एक नोडल एजेन्सी द्वारा कराया जायेगा।
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जनपद वाराणसी में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार के
मेडिकल कॉलेज के प्रस्तावित शिक्षण संकाय के निर्माण हेतु ग्राम पिण्डरा
में 13 एकड़ भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव स्वीकृत
प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की सम्पूर्ण स्थापना में लगभग 800 करोड़ रुपये का व्यय सम्भावित है। इसके माध्यम से चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा संविदा स्टाफ सहित बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। मेडिकल कॉलेज हेतु एम0बी0बी0एस0 की अधिकांश सीटें उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थियों को उपलब्ध होंगी। इसमें कर्मचारी राज्य बीमा हितलाभ धारकों (बीमित व्यक्तियों) के बच्चों के लिए भी आरक्षण का प्राविधान किया गया है।
भविष्य में नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कोर्सेज़ भी प्रारम्भ किये जा सकेंगे। यह मेडिकल कॉलेज प्रदेश में श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक उपयुक्त एवं सम्यक कदम होगा। इससे वाराणसी एवं आस-पास के जनपदों के संगठित क्षेत्र के 1.45 लाख ई0एस0आई0 कार्डधारक श्रमिकों एवं उनके 5.50 लाख परिजनों को बेहतर चिकित्सा-शिक्षा एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याणकारी राज्य की अवधारणा की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसका व्यय भार भी राज्य सरकार पर नहीं आएगा।
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जनपद गोरखपुर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार के
100 बेड चिकित्सालय की स्थापना के सम्बन्ध में
मंत्रिपरिषद ने जनपद गोरखपुर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार के 100 बेड चिकित्सालय की स्थापना हेतु गीडा सेक्टर-09 (संस्थागत) स्थित भूखण्ड संख्या एएल-7 क्षेत्रफल 21427 वर्ग मीटर (5.249 एकड़) भूमि उपलब्ध कराने हेतु वर्तमान आवंटन दर (टेलीस्कोपिक दर 8720 रुपये प्रति वर्ग मीटर) के स्थान पर रियायती दर 2,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से 4,28,54,000 रुपये तथा लोकेशनल चार्ज 60,70,500 रुपये सम्मिलित करने पर कुल प्रीमियम 4,89,24,500 रुपये के साथ ही, नियमानुसार अन्य शुल्क हेतु प्राविधान सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
जनपद गोरखपुर में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 100 बेड चिकित्सालय की स्थापना से गोरखपुर क्षेत्र में 58 हजार बीमित व्यक्तियों तथा 2.25 लाख हित लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाएं सुलभ होंगी एवं प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार का सृजन भी होगा।
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जनपद मुरादाबाद में कर्मचारी राज्य बीमा निगम, भारत सरकार के
100 शैय्या चिकित्सालय के लिए ग्राम हरथला, तहसील मुरादाबाद में
2.025 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क आवंटित करने का प्रस्ताव अनुमोदित
इस चिकित्सालय के निर्माण से जनपद मुरादाबाद एवं आस-पास के जनपदों के लगभग 93,591 बीमांकित कामगारों एवं उनके परिवार के 3,55,646 सदस्यों को चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सकेगी।
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होमगार्ड्स विभाग के होमगार्ड्स स्वयंसेवकों/अवैतनिक अधिकारियों एवं उनके
आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने का प्रस्ताव स्वीकृत
होमगार्ड्स स्वयंसेवकों/अवैतनिक अधिकारियों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को साचीज़ (स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एण्ड इण्टीग्रेटेड सर्विसेज) के माध्यम से प्रति परिवार प्रतिवर्ष 05 लाख रुपये की सीमा तक राजकीय चिकित्सालयों तथा साचीज़ से सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के अन्तर्गत आई0पी0डी0 (अन्तर्रोगी विभाग) उपचार हेतु कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा अनुमन्य कराये जाने पर प्रति होमगार्ड्स स्वयंसेवक/अवैतनिक अधिकारी 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से, 35.50 करोड़ रुपये का वार्षिक वित्तीय व्यय भार अनुमानित है।
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वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति की संस्तुतियों
को स्वीकार करते हुए इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने का प्रस्ताव अनुमोदित
ज्ञातव्य है कि वेतन समिति (2016) द्वारा निम्नलिखित प्रकरणों के सम्बन्ध में दी गयी संस्तुतियों का मुख्य सचिव समिति द्वारा विचार कर संस्तुतियां प्रदान की गयी हैं :-
वर्दी/वर्दी नवीनीकरण/वर्दी धुलाई भत्ता, गृह (पुलिस) विभाग से सम्बन्धित भत्ते, अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों/अधिकारियों से सम्बन्धित भत्ते, अवकाश यात्रा सुविधा, शिक्षा सम्बन्धी सहायता, बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, प्राविधिक शिक्षा विभाग, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग, श्री राज्यपाल सचिवालय, उत्तर प्रदेश विधान सभा सचिवालय एवं विधान परिषद सचिवालय।
उक्त संस्तुतियों में गृह (पुलिस) विभाग के कार्मिकों को प्राप्त हो रहे भत्तों में वृद्धि किये जाने तथा न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के कर्मचारियों को अनुमन्य वर्दी/वर्दी नवीनीकरण/वर्दी धुलाई भत्ता में वृद्धि किये जाने का निर्णय लिया गया है। अन्य प्रकरणों में कोई संशोधन किये जाने का निर्णय नहीं लिया गया है। इन संस्तुतियों को लागू किये जाने से राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आयेगा।
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नगर निगम, गोरखपुर में 80 करोड़ रुपये तथा नगर निगम, मुरादाबाद
में 50 करोड़ रु0 तक के म्युनिसिपल बॉण्ड निर्गत करने के सम्बन्ध में
ज्ञातव्य है कि नगरीय अवस्थापना संरचनाओं व सुविधाओं के विकास तथा वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिए निकायों को विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धनराशि की आवश्यकता होती है। विभिन्न वित्तीय स्रोतों से प्राप्त धनराशि के उपयोग में वित्तीय अनुशासन एवं प्रबन्धन एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अतः निकायों में सुदृढ़ राजकोषीय प्रबन्धन, मार्केट ओरिएन्टेशन एवं क्रेडिट वर्दीनेस बढ़ाने के लिए भारत सरकार की प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड निर्गत करने के लिए धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है।
म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से धनराशि मार्केट से रेज़ करने पर प्रत्येक 100 करोड़ रुपये के सापेक्ष 13 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। 200 करोड़ रुपये के बॉण्ड इशू तक अधिकतम 26 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। भारत सरकार द्वारा इन्सेन्टिव की धनराशि एस्क्रो एकाउण्ट में डालने का प्राविधान किया गया है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने हेतु सभी नगर निगम सेबी (इशू एण्ड लिस्टिंग ऑफ म्युनिसिपल डेब्ट सिक्योरिटीज-आई0एल0एम0डी0एस0) रेगुलेशन्स, 2015 (यथा संशोधित) का अनुपालन करते हुए कार्यवाही करेंगे।
भारत सरकार द्वारा निर्गत अमृत 2.0 की गाइडलाइन्स में निकायों द्वारा अपने अंश की धनराशि प्राप्त करने के लिए म्युनिसिपल बॉण्ड निर्गत करने का सुझाव दिया गया है। उक्त के दृष्टिगत निकायों की क्रेडिट वर्दीनेस बढ़ाने एवं म्युनिसिपल बॉण्ड निर्गत करने के लिए अमृत 2.0 के अन्तर्गत स्टेट लेवल रिफॉर्म्स में सम्मिलित किया गया है। नगर निगम, गोरखपुर तथा नगर निगम, मुरादाबाद द्वारा नगर निगम सदन का अनुमोदन प्राप्त करते हुए परियोजनाओं का चयन कर लिया गया है।
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जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत
कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ किये
जाने तथा तद्सम्बन्धी अधिसूचना निर्गत करने का प्रस्ताव अनुमोदित
ज्ञातव्य है कि कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम जी की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं ग्रन्थों में इसका प्रमुखता से उल्लेख पाया जाता है। जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय निवासियों द्वारा जलालाबाद का नाम भगवान परशुराम जी के नाम पर परशुरामपुरी रखे जाने की मांग की जाती रही है। इसके दृष्टिगत भारत सरकार के पत्र संख्या-11/40/2025-एम0 एण्ड जी0, दिनांक 19.08.2025 द्वारा नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ किये जाने के प्रस्ताव पर अनापत्ति प्रदान की गई है।
इसके क्रम में मंत्रिपरिषद द्वारा जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ किये जाने के प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया गया है। यह प्रस्ताव अधिसूचना की निर्गमन की तिथि से प्रभावी होगा।
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जनपद रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय की स्थापना हेतु ग्राम पडेरा,
परगना व तहसील सदर में 22 हे0 भूमि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान
विभाग को निःशुल्क हस्तान्तरित करने का प्रस्ताव स्वीकृत
प्रदेश में राज्य सहायतित 04 कृषि विश्वविद्यालय यथा चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर, आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा तथा सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ स्थापित हैं। इसके अलावा, राज्य सहायतित महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की स्थापना जनपद कुशीनगर में की जा रही है।
समस्त स्थापित कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों में उद्यान विभाग स्थापित है, जिनमें उद्यान विषयक अध्ययन-अध्यापन कार्य संचालित होता है। उक्त के समान ही कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के अन्तर्गत एक उद्यान महाविद्यालय की स्थापना जनपद रायबरेली में किये जाने का प्रस्ताव है, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपये का व्यय भार आयेगा।
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‘उ0प्र0 अन्तरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली 2022’ में कतिपय
विभागों के चिन्हित पद सम्मिलित करने हेतु संशोधन का प्रस्ताव स्वीकृत
मंत्रिपरिषद ने ‘उ0प्र0 अन्तरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली 2022’ में कतिपय विभागों के चिन्हित पद सम्मिलित करने हेतु संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। इसके अनुसार भर्ती आयोग की परिधि से ऐसे पदों के बाहर होने की स्थिति के दृष्टिगत यह पद नियमावली-2022 के अन्तर्गत समुचित परिशिष्ट में सम्मिलित किये जाएंगे। इसमें खेल विभाग के अन्तर्गत क्रीड़ाधिकारी के 09 पद, युवा कल्याण विभाग के अन्तर्गत जिला युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल अधिकारी के 03 पद तथा खेल विभाग के अन्तर्गत उपक्रीड़ाधिकारी के 23 पद प्रस्तावित किये गये हैं।
ज्ञातव्य है कि राज्य सरकार द्वारा खेल गतिवधियों को दिये जा रहे प्रोत्साहन, खेल अवसंरचना के विकास तथा खेल के क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती रुचि के परिणामस्वरूप अन्तरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभागिता और पदक प्राप्ति में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियां की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसके दृष्टिगत ‘उ0प्र0 अन्तरराष्ट्रीय पदक विजेता सीधी भर्ती नियमावली 2022’ के अन्तर्गत उन्हें सेवायोजित करने हेतु सम्मिलित पद एवं उनकी संख्या अपर्याप्त है। खिलाड़ियों को सेवायोजन प्रदान करने के लिए पदों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया है।
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राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत प्राप्त धनराशि के सम्बन्ध में
वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य वित्त आयोग के अन्तर्गत 14,988.50 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है। इसकी 10 प्रतिशत धनराशि लगभग 1,498 करोड़ रुपये होती है। इसी 10 प्रतिशत धनराशि में से 495.89 करोड़ रुपये पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय/बैठक भत्ता पर व्यय होने हैं। शासनादेश संख्या-2350/ 33-3-2021 - 2257/2021 दिनांक 16 दिसम्बर, 2021 में प्राविधान है कि पंचायत पदाधिकारियों का मानदेय/बैठक भत्ता भुगतान, राज्य वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली धनराशि के 10 प्रतिशत धनराशि में से केन्द्रीय वित्त आयोग की भांति प्रशासनिक एवं ओ0 एण्ड एम0 मद में अनुमन्यता के आधार पर किया जाएगा।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 157.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग के अन्तर्गत गठित वित्त प्रकोष्ठ में राज्य/मण्डल/जनपद/विकास खण्ड स्तर पर कार्यरत कार्मिकों के मानदेय एवं राज्य/मण्डल/जनपद/विकास खण्ड स्तर की तकनीकी/प्रशासनिक/सिविल/अन्य आवश्यकताओं में व्यय होने का अनुमान है, जो कि राज्य वित्त आयोग की वर्तमान किस्त का लगभग 1.05 प्रतिशत है। यह शासनादेश दिनांक 12 सितम्बर, 2024 के अनुरूप है।
ज्ञातव्य है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 हेतु शासनादेश संख्या-प्ध्741224ध्2024, दिनांक 12 सितम्बर, 2026 एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु शासनादेश संख्या-प्ध्1058317ध्2025 दिनांक 14 अगस्त, 2025 द्वारा तीनों स्तरों की पंचायतों को राज्य वित्त आयोग से प्राप्त धनराशि का 1.05 प्रतिशत निदेशालय स्तर पर रोककर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग कार्मिकों के मानदेय, तकनीकी, प्रशासनिक, सिविल, अन्य आवश्यकताओं हेतु व्यय किये जाने के निर्देश दिए गये हैं। उक्त शासनादेश मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त जारी किये गये थे।
पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के तकनीकी कार्य कराये जा रहे हैं। इसमें गोबरधन इकाइयों की स्थापना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेन्ट यूनिट स्थापना, फीकल स्लज मैनेजमेन्ट, ब्लैक व ग्रे-वॉटर मैनेजमेन्ट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट आदि शमिल हैं। इसके लिए ग्राम पंचायतों को कार्ययोजना तैयार करने तथा कार्यों के संचालन हेतु प्रोफेशनल मैनपावर व अन्य तकनीकी सेवाओं की आवश्यकता होती है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा वित्त आयोग की धनराशि से कराये जाने वाले कार्यों के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों को लगभग 3896 कर्मियों द्वारा तकनीकी एवं अन्य प्रकार की सेवाएं दी जा रही है। इनका वेतन/मानदेय शासनादेश दिनांक 12 सितम्बर, 2024 तथा दिनांक 14 अगस्त, 2025 में दी गयी व्यवस्था के अनुसार क्रमशः वित्तीय वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 में दिया गया है।
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