लव-जिहाद के शिकार चन्द्रभूषण त्रिपाठी के परिवार का विज्ञापन कारोबार में समीर की भूमिका भी संदेह में


मोनिश हसन ने बेहद शातिराना अंदाज में खेला लव एण्ड लैण्ड जिहाद का खेल


लखनऊ। कहते है कि प्रेम-विवाह करने वाले न जाति देखते है और न ही धर्म, लेकिन बरबादी के कगार पर पहुंचे शहर के हंसते-खेलते परिवार का जो मामला हाल में सामने आया है, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में मोनिश हसन नामक व्यक्ति ने सुनियोजित ढंग से लव और लैण्ड जिहाद की परिभाषा धरातल पर गढ़ते हुये पहले तो शहर में विज्ञापन के क्षेत्र में कार्य कर रही प्रमुख एजेन्सी चाणक्य एडवर्टाइजर्स के मुखिया रहे चन्दभूषण त्रिपाठी की बेटी शिल्पी त्रिपाठी के साथ निकाह किया और उसके बाद चन्द्रभूषण त्रिपाठी और मनीष त्रिपाठी की सम्पत्ति को हड़पने का काम किया। बताते है चन्द्रभूषण की मौत के बाद मोनिश ने अनरजिस्टर्ड फर्जी   वसीयतनामा के आधार पर गीता त्रिपाठी से उन्हें स्वामिनी बताकर अपनी पत्नी अर्शी हसन उर्फ शिल्पी त्रिपाठी के नाम गिफ्ट डीड करवा ली फिर उसके बाद छोटे बेटे की विधवा पर उसकी बेटी को बंधक बनाकर व दबाव बनाकर गिफ्ट डीड भी अर्शी हसन उर्फ शिल्पी त्रिपाठी के नाम करवा ली और यही नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से विज्ञापन कारोबार कर रही एजेन्सी चाणक्य एडवर्टाइजर्स पर भी कब्जा जमा लिया और वर्तमान समय में एजेन्सी में पहले वरिष्ठ विपणन अधिकारी की जिम्मेदारी निभाने वाले समीर पाठक एजेन्सी का पूरा दायित्व निभा रहे है, यह कैसे संभव हुआ यह एक बहुत बड़ा सवाल ही बल्कि इसकी भी जांच बहुत जरूरी है। इस प्रकरण में समीर पाठक की भी भूमिका संदेह में नजर आ रही है।


बीते वर्ष के दिसम्बर में परिवार ने जैसे ही तीसरे और आखिरी पुरूष को खोया वैसे ही मोनिश हसन अपने पूरे लैण्ड जिहाद के रंग में आ गया पहले तो अपनी सास को विश्वास में लेकर अपने पास बुला लिया और सम्पत्तियों की गिफ्ट डीड निकाह के बाद इस्लाम धर्म अपनाने वाली अर्शी हसन उर्फ शिल्पी त्रिपाठी के नाम करवा ली फिर उसके बाद चन्द्रभूषण की सम्पत्ति के हिस्सेदार दिवंगत बेटे की पत्नी से उसकी बेटी को बंधक बनाकर जोर दबाव डालकर गिफ्टडीड शिल्पी के ही नाम करवा दी। इसी तरह परिवार का एकमात्र जरिया विज्ञापन एजेन्सी पर भी सुनियोजित ढंग से कब्जा जमा लिया। बरबादी के कगार पर पहंुचे इस परिवार के दोनों विधवा महिलाओं ने अखण्ड आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी और अधिवक्ता जीके दीक्षित के साथ पहली बार मीडिया के सामने आकर मोनीस हसन पर लव और लैण्ड जिहाद का आरोप लगाया था, उसके अगले दिन मोनिश हसन इस मामले को पारिवारिक सम्पत्ति विवाद का रंग देते हुये अर्शी हसन उर्फ शिल्पी त्रिपाठी की मां गीता त्रिपाठी को भी अपना पक्ष रखने के लिये सामने लाया। इस पूरे मामले में गंभीरता से नजर डाली जाये तो मोनिश हसन ने जिस सुनियोजित ढंग से लव एण्ड लैण्ड जिहाद का खेल खेला है, उससे कतई इंकार नहीं किया जा सकता है। 


बताते है कि इस हंसते-खेलते परिवार में काली छाया उसी दिन पड़ गयी थी जब परिवार की बेटी शिल्पी के साथ पढ़ने वाली मुस्लिम सहेली ने अपने भाई मोनिश हसन से शिल्पी की पढ़ायी के जीवनकाल में मुलाकात करायी, और यही मुलाकात आगे चलकर चन्द्र भूषण त्रिपाठी के परिवार के लिये बरबादी का कारण बन गया। इन दोनों की मुलाकातों में शिल्पी ने जाति-धर्म को पीछे छोड़कर मोनिश का अपनाया लेकिन मोनिश के दिल में लव और लैण्ड जिहाद की आग सुलग रही थी, जिसका परिणाम आज सामने है।