मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अनियमित वर्षा से उत्पन्न दोहरी चुनौती, एक ओर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की आशंका और दूसरी ओर अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में सम्भावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की

बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुँचाई जाए

वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक जनपद की स्थिति अलग, राहत एवं बचाव की रणनीति भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जाए

सामान्य से कम वर्षा वाले जनपदों में कृषि गतिविधियाँ प्रभावित न हों, नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई
संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए

जहाँ वर्षा की कमी के कारण बुवाई प्रभावित होने की आशंका, वहाँ कृषि एवं सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं

बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जनपदों में अगले तीन दिनों में सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार करने के निर्देश
 
राहत शिविरों में ताजा एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएं

आवश्यकतानुसार सामान्य नावों के साथ बड़ी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाए

प्रशिक्षित ’आपदा मित्रों’ की सेवाएँ व्यापक रूप से ली जाएं तथा प्रत्येक जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित मॉनीटरिंग करें

एन0डी0आर0एफ0, एस0डी0आर0एफ0, पी0ए0सी0, पुलिस, राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन एवं स्थानीय प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें

तटबन्धों की सुरक्षा एवं चौबीसों घण्टे निगरानी एवं नियमित पेट्रोलिंग करायी जाए, कटान अथवा रिसाव की आशंका होने पर
तत्काल सुरक्षात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए

पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए, उन्हें जलभराव वाले क्षेत्रों में न रहने दिया जाए

लखनऊ : 20 जुलाई, 2026

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि बाढ़ हो या सूखा, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, किसानों की फसल और आमजन की आजीविका की रक्षा करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समयबद्ध सहायता पहुँचायी जाए।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में अनियमित वर्षा से उत्पन्न दोहरी चुनौती, एक ओर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की आशंका और दूसरी ओर अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में सम्भावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक जनपद की स्थिति अलग है, इसलिए राहत एवं बचाव की रणनीति भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिन जनपदों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, वहाँ कृषि गतिविधियाँ प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नहरों, जलाशयों, राजकीय नलकूपों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बुवाई एवं सिंचाई के रियल टाइम आंकड़ों की नियमित समीक्षा कर किसानों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध करायी जाए। जहाँ वर्षा की कमी के कारण बुवाई प्रभावित होने की आशंका है, वहाँ कृषि एवं सिंचाई विभाग संयुक्त कार्ययोजना बनाकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में किसानों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही अधिक वर्षा वाले जिलों में बाढ़ राहत एवं बचाव की तैयारियाँ पूरी सतर्कता के साथ संचालित की जाएं। राहत आयुक्त कार्यालय का कण्ट्रोल रूम चौबीसों घण्टे सक्रिय रहे तथा प्रत्येक घण्टे की अद्यतन जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय, पुलिस महानिदेशक कार्यालय और सम्बन्धित राहत एजेंसियों को उपलब्ध करायी जाए। राज्य स्तरीय डैशबोर्ड पर प्रत्येक जनपद की स्थिति नियमित रूप से अद्यतन की जाए।
मुख्यमंत्री जी ने बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील जनपदों में अगले तीन दिनों के भीतर सभी राहत शिविर पूरी तरह तैयार करने के निर्देश दिए। राहत शिविरों में ताजा एवं पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएं। बच्चों के लिए डेयरी के माध्यम से दूध उपलब्ध कराया जाए। महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों तथा गर्भवती महिलाओं की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। राहत सामग्री किट गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जहाँ आवश्यकता हो, वहाँ सामान्य नावों के साथ बड़ी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाए। प्रशिक्षित ’आपदा मित्रों’ की सेवाएँ व्यापक रूप से ली जाएं तथा प्रत्येक जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित मॉनीटरिंग करें। एन0डी0आर0एफ0, एस0डी0आर0एफ0, पी0ए0सी0, पुलिस, राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पशुपालन एवं स्थानीय प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। आकाशीय बिजली, अतिवृष्टि, जनहानि आदि के सम्बन्ध में मौसम विभाग, केन्द्रीय जल आयोग तथा नेपाल से प्राप्त जलस्तर सम्बन्धी सूचनाओं का सतत विश्लेषण करते हुए समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जाएं तथा सम्भावित खतरे की स्थिति में प्रभावित आबादी को पूर्व सूचना देकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने तटबन्धों की सुरक्षा पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि उनकी चौबीसों घण्टे निगरानी एवं नियमित पेट्रोलिंग करायी जाए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कारणों के साथ अराजक तत्वों द्वारा भी तटबन्धों को नुकसान पहुँचाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। जहाँ कटान अथवा रिसाव की आशंका हो, वहाँ तत्काल सुरक्षात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। राहत सामग्री, नाव, मोटरबोट तथा अन्य आवश्यक संसाधनों से सम्बन्धित सभी टेण्डर एवं प्रशासनिक औपचारिकताएँ तत्काल पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री जी ने पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि पशुओं को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए तथा उन्हें जलभराव वाले क्षेत्रों में न रहने दिया जाए। मौसम के अनुरूप संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए पशुओं का समयबद्ध टीकाकरण भी सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश के 04 जनपदों की 04 तहसीलों के 42 गाँव प्रभावित हैं, जहाँ 332 लोग प्रभावित हुए हैं। वर्तमान में बलिया, गौतमबुद्धनगर, लखीमपुर खीरी तथा मुजफ्फरनगर प्रभावित जनपद हैं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 1,412 बाढ़ चौकियाँ सक्रिय हैं। 549 मेडिकल टीमों का गठन किया गया है, 55 नाव एवं मोटरबोट राहत कार्यों में लगायी गई हैं तथा 1,096 बाढ़ शरणालय संचालित हैं। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करायी जा रही है।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील 44 जनपदों में व्यापक पूर्व तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। 1,694 राहत शरणालय चिन्हित किए गए हैं, जिनमें लगभग 5.14 लाख लोगों को आश्रय देने की क्षमता है। सभी जनपदों में कण्ट्रोल रूम सक्रिय हैं तथा एन0डी0आर0एफ0, एस0डी0आर0एफ0 और पी0ए0सी0 की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व से तैनात कर दी गई हैं। पशुधन की सुरक्षा के लिए 910 पशु शरणालय स्थापित किए गए हैं तथा आवश्यक टीमें भी तैनात हैं।
मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि बाढ़ प्रबन्धन को और प्रभावी बनाने के लिए नदियों का चैनेलाइजेशन कार्य निरन्तर जारी रखा जाए, जिससे जल प्रवाह सुचारु रहे और कटान व जलभराव की स्थिति न्यूनतम हो। उन्होंने कहा कि अग्नि दुर्घटना में यदि किसी गरीब परिवार का आवास नष्ट होता है, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत तत्काल आवास उपलब्ध कराया जाए। नगर क्षेत्रों में खुले मेनहोल को तत्काल ढकने तथा जनसुरक्षा से जुड़े सभी एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
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