मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वृक्षारोपण महाभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा की
वृक्षारोपण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का व्यापक जन-आन्दोलन : मुख्यमंत्री
12 जुलाई, 2026 को एक दिन में 35 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य, प्रत्येक विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी गम्भीरता और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करे
अभियान की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और उसके वृक्ष बनने से तय होगी
वृक्षारोपण महाभियान-2026 औपचारिकता नहीं, प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा
पर्यावरण संरक्षण को जनसहभागिता से जोड़ते हुए उ0प्र0 को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए
पौधरोपण स्थलों का पूर्व सत्यापन, गड्ढों की तैयारी, पौधों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का चयन, सिंचाई, जियो टैगिंग तथा नियमित अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थी किसानों को वृक्षारोपण अभियान से जोड़ा जाए
रोपे जाने वाले पौधों से अधिकतम जैव-विविधता सुनिश्चित की जाए तथा इनमें फलदार, छायादार, औषधीय और इमारती प्रजातियों का संतुलित समावेश हो
05 जून, 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 05 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए गए
लखनऊ : 06 जुलाई, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का व्यापक जन-आन्दोलन है। ’एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को जनभागीदारी का महायज्ञ बनाते हुए 12 जुलाई, 2026 को उत्साह और उत्सवपूर्ण वातावरण में इस वर्ष वृक्षारोपण महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक नागरिक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, किसान, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सभी सरकारी विभागों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और उसके वृक्ष बनने से तय होगी। यह औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ अपने सरकारी आवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वृक्षारोपण महाभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने इस उच्चस्तरीय बैठक में आगामी 12 जुलाई के वृक्षारोपण महाअभियान के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, पंचायतीराज, राजस्व, नगर विकास सहित सभी सम्बन्धित विभागों के आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप विभागीय माइक्रोप्लान की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने में हरित विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पर्यावरण संरक्षण को जनसहभागिता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए तथा प्रत्येक विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी गम्भीरता और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करे। उन्होंने निर्देश दिए कि आगामी 12 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान को पूरी तैयारी, समन्वय और जवाबदेही के साथ सम्पन्न कराया जाए। पौधरोपण स्थलों का पूर्व सत्यापन, गड्ढों की तैयारी, पौधों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का चयन, सिंचाई, जियो टैगिंग तथा नियमित अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधरोपण के समय प्रत्येक एक घण्टे के अन्तराल पर प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि प्रदेश ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 15 प्रतिशत तथा वर्ष 2047 तक 20 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आगामी 05 वर्षों में प्रतिवर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण की कार्ययोजना बनायी गई है, जिससे लगभग 72 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्साइड के अवशोषण की क्षमता विकसित होगी।
बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उत्तर प्रदेश ने हरित क्षेत्र बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। वर्ष 2017 से वर्ष 2023 के बीच वन एवं वृक्षावरण में लगभग 3.38 लाख एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का वन एवं वृक्षावरण वर्ष 2017 के 9.18 प्रतिशत से बढ़कर 9.96 प्रतिशत हो गया है। वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा कार्बन स्टॉक में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से वर्ष 2025 के बीच प्रदेश में 242 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जबकि वर्ष 2009 से 2016 के बीच यह संख्या 51.48 करोड़ थी।
बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पौधशालाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्तमान में 1,939 विभागीय पौधशालाओं के साथ उद्यान, रेशम तथा निजी पौधशालाओं के माध्यम से 57 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, 38 नई पौधशालाएँ भी स्थापित की गई हैं। वृक्षारोपण महाभियान के लिए ग्रामीण एवं शहरी माइक्रोप्लान लगभग पूर्ण हो चुके हैं। अक्टूबर, 2025 से जून, 2026 के बीच जिला वृक्षारोपण समितियों की 588 बैठकें आयोजित की गईं। 05 जून, 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष अभियान में 05 करोड़ पौधरोपण के लक्ष्य के सापेक्ष 5.01 करोड़ पौधे लगाए गए, जबकि 12 जुलाई, 2026 को 35 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थी किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाए। रोपे जाने वाले पौधों में अधिकतम जैव-विविधता सुनिश्चित की जाए तथा फलदार, छायादार, औषधीय और इमारती प्रजातियों का संतुलित समावेश हो। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान में रेलवे, रक्षा मंत्रालय, हाईकोर्ट सहित सभी न्यायालयों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कार्मिकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इस सम्बन्ध में अगले तीन दिनों के भीतर सभी स्तरों पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए।
बैठक में आगामी विशेष पहलों की भी जानकारी दी गई। इसके अन्तर्गत मिशन छाया, समरस वन, समृद्धि वन, सिटी वन, कपि वन, महर्षि चरक औषधि वन, ऊर्जा वन, पौराणिक वन तथा अविरल धारा वन जैसी अभिनव अवधारणाओं पर कार्य किया जा रहा है। हीट वेव के प्रभाव को कम करने के लिए सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर छायादार वृक्ष लगाने हेतु मिशन छाया संचालित किया जाएगा। खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए समृद्धि वन, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए समरस वन तथा मानव और वानर संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से नगर क्षेत्रों के बाहर कपि वन विकसित किए जाएंगे।
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