शादी विवाह अनुदान योजना से पिछड़ा वर्ग के गरीब परिवारों को मिला आर्थिक सहारा
लखनऊ: 13 अगस्त, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का मंतव्य है कि समाज के हर व्यक्ति का शैक्षिक, आर्थिक एवं सामाजिक विकास समान रूप से हो और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने सभी विभागों में अनेक योजनाओं का संचालन किया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के माध्यम से चलायी जा रही सभी योजनाएं केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पिछड़े वर्ग के परिवारों को सम्मानजनक जीवन, बेहतर शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। प्रदेश का पिछडा वर्ग कल्याण विभाग इस संकल्प को धरातल पर उतारने में सबसे अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
किसी भी राज्य या राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि समाज का अंतिम व्यक्ति और सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग विकास की मुख्यधारा से न जुड़ जाए। उत्तर प्रदेश, जो अपनी विशाल आबादी और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, वर्तमान में समावेशी विकास (Inclusive Growth) के एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र को आत्मसात् करते हुए समाज के पिछड़े वर्गों (ओ०बी०सी०) के उत्थान के लिए योजनाबद्ध और पारदर्शी ढंग से शादी/विवाह योजना लागू की है। यह योजना वर्ष 2016-17 के बाद से पूर्णतया ऑनलाईन है, जिसमें शादी लिए आवेदक को वेबसाइट http://shadianudan.upsdc.gov.in  पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में 210 करोड़ रूपये बजट का प्राविधान किया गया है, जिसके अन्तर्गत योजना का वार्षिक लक्ष्य 1,05,000 को लाभान्वित करना है, जिसके सापेक्ष अब तक 64,584 आवेदन प्राप्त हुऐ हैं, जिसमें 5,032 लाभार्थियों को 10.064 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया है। वर्ष 2025-26 में 1,16,000 गरीब परिवार की पुत्रियों के विवाह हेतु सम्बन्धितों के खाते में 232 करोड़ रुपये हस्तान्तरित किये गये है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जहाँ सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की प्रमुख योजनाओं में विवाह अनुदान योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछडा वर्ग (अल्पसंख्यक वर्ग को छोड़कर) के गरीब परिवारों की पुत्रियों के विवाह हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराया जाता है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ कम हो सके। इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी को प्रति विवाह रु0 20,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इस योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को दिया जाता है जिनकी वार्षिक आय रु0 1,00,000 से अधिक नहीं है। विवाह के समय कन्या की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा वर की आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है। आवेदन करने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी को ऑनलाइन जाति प्रमाण-पत्र का विवरण देना होता है। योजना में निराश्रित एवं विधवा महिलाओं को प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया गया है। एक परिवार की अधिकतम दो पुत्रियों को इस योजना का लाभ दिया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विवाह अनुदान योजना को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। लाभार्थी जन सेवा केंद्र, जिला पिछडा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय, साइबर कैफे अथवा विभागीय पोर्टल के माध्यम से स्वयं आवेदन कर सकते हैं। आवेदन विवाह से 90 दिन पूर्व अथवा विवाह के 90 दिन बाद तक किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन के साथ आधार, आय प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह से संबंधित दस्तावेज तथा बैंक खाते का विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसके बाद संबंधित अधिकारी द्वारा निर्धारित समय में सत्यापन किया जाता है। पारदर्शिता, तकनीक के कुशल प्रयोग (डी०बी०टी०/पी०एफ०एम०एस०) और जन-केंद्रित शासन के चलते आज उत्तर प्रदेश का पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। यह यात्रा केवल योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लाखों पिछड़े वर्ग के नागरिकों को स्वाभिमान, समानता और आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। शादी अनुदान योजना के माध्यम से गरीब बेटियों की शादी बिना किसी आर्थिक मानसिक तनाव के संपन्न हो रही है।
इस योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय सत्यापन व्यवस्था विकसित की है। शहरी क्षेत्रों में नामित लेखपाल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम विकास अधिकारी अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी दस्तावेजों का सत्यापन करते हैं। ऑनलाइन आवेदन की तिथि से 21 दिनों के भीतर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके पश्चात जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी आवेदन का परीक्षण कर आगे की स्वीकृति प्रक्रिया पूरी करते हैं। योजना के प्रभावी संचालन के लिए जिला स्तर पर निगरानी समिति गठित की गई है। जिलाधिकारी इसकी अध्यक्षता करते हैं तथा जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, संबंधित खण्ड विकास अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी सदस्य होते हैं। समिति प्रत्येक माह बैठक कर योजना की प्रगति की समीक्षा करती है। इसके अतिरिक्त विवाह अनुदान स्वीकृति हेतु अलग जिला स्तरीय समिति भी गठित है, जिसमें जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, सांसद, विधायक एवं जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी शामिल होते हैं।