बज़्म-ए-ख़्वातीन के तत्वावधान में जश्न-ए-आज़ादी का आयोजन


लखनऊ। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बज़्म-ए-ख़्वातीन के तत्वावधान में जनाना पार्क, अमीनाबाद में जश्न-ए-आज़ादी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने देशभक्ति से ओत-प्रोत तराना “सारे जहाँ से अच्छा” प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय विद्यालय, लखनऊ की पूर्व प्राचार्या डॉ. शाहिदा सिद्दीकी ने कहा कि आज हम अपने अज़ीम मुल्क भारत का यौम-ए-आज़ादी मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। यह दिन हमें उन बेशुमार कुर्बानियों की याद दिलाता है, जो हमारे बुजुर्गों ने देश की आज़ादी हासिल करने के लिए दीं। 15 अगस्त केवल एक तारीखी दिन नहीं, बल्कि एकता, भाईचारे और कौमी सद्भावना का संदेश भी देता है।

प्रोफेसर सामिया रईस ने कहा कि भारत ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्म, भाषाएँ और रस्मो-रिवाज एक साथ परवान चढ़ रहे हैं। कहीं हिंदी, कहीं उर्दू, कहीं तमिल, कहीं मराठी और कहीं पंजाबी बोली जाती है। कहीं दिवाली मनाई जाती है, कहीं ईद की खुशियाँ और कहीं क्रिसमस व गुरु नानक जयंती। उन्होंने कहा कि हमारी यह रंगारंगी तहज़ीब हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। फूलों की खूबसूरती एक रंग से नहीं, बल्कि अनेक रंगों के मेल से पैदा होती है।

बज़्म-ए-ख़्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज़ सिदरत ने अपने संबोधन में कहा कि आज़ादी हमें केवल अपने अधिकारों का एहसास नहीं कराती, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों की याद भी दिलाती है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम एक-दूसरे के धर्म, भाषा, संस्कृति और जज़्बात का सम्मान करें। हमें नफरत के बजाय प्रेम, विरोध के बजाय संवाद और बंटवारे के बजाय एकता को बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि हम जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के नाम पर एक-दूसरे से दूर हो जाएँ तो हमारी ताकत कमजोर होगी। लेकिन यदि हम अपने मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ें, तो दुनिया की कोई ताकत हमें तरक्की करने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि इस जश्न-ए-आज़ादी पर हम संकल्प लें—“हम भिन्न जरूर हैं, लेकिन बँटे हुए नहीं हैं। हमारी भाषाएँ भिन्न हो सकती हैं, मगर हमारा दिल एक है। हमारी संस्कृतियाँ भिन्न हो सकती हैं, मगर हमारा वतन एक है।” उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि एक अच्छा हिंदुस्तानी बनने के लिए सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथियों डॉ. हुमा ख्वाजा, डॉ. सुधा मिश्रा, डॉ. इशरत नाहिद, डॉ. शाहिदा सिद्दीकी एवं नसरीन सुहैल द्वारा बज़्म-ए-ख़्वातीन यूथ विंग की सक्रिय सदस्यों को मेडल एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन नशात हैयातुल्लाह ने किया। कार्यक्रम में महिलाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने जश्न-ए-आज़ादी को यादगार बना दिया।