योगी सरकार के संकल्प को गति देगा राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड-मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
किसानांे की उपज को समुद्र पार पहुंचाने का माध्यम बनेगा राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड-उद्यान मंत्री
राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक में निर्यात सुगम बनाने पर हुआ मंथन और वेबसाइट का किया गया शुभारम्भ
सभी 75 जिलों से किसान, निर्यातक और एफपीओ जुटे, निर्यातकों और एफपीओ के बीच हुए एमओयू
बोर्ड की वेबसाइट से पता चलेगा कि किस जिले की कौन-सी
उपज किस देश में बिकेगी
उत्तर प्रदेश में विकसित हुए करीब 3,000 निर्यातक, वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ रहे किसान
1000 करोड़ का भामाशाह भाव स्थिरता कोष, शीतगृह किराये और बीज पर दी जा रही छूट
लखनऊ: 27 अगस्त, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की उपज को स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों से आगे वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने तथा कृषि एवं औद्यानिकी क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में गुरुवार को ऑडिटोरियम, उद्यान भवन, लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक एवं कार्यशाला आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने की। इस अवसर पर बोर्ड की वेबसाइट का शुभारंभ किया गया तथा निर्यातकों और एफपीओ के बीच एमओयू भी हुआ। बैठक में प्रदेश के सभी 75 जनपदों से प्रगतिशील किसान, निर्यातक, एफपीओ, उत्पादक कंपनियां और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनके छोटे-छोटे प्रयासों से राज्य के किसानों की उपज को सात समंदर पार तक पहुंचाने का माध्यम राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड बनेगा। बोर्ड की वेबसाइट ीजजचेरूध्ध्नचेीमइण्पदध् का शुभारंभ किसानों और निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में सामने आया है। अब प्रदेश का किसान अथवा निर्यातक यह जानकारी प्राप्त कर सकेगा कि उसके जनपद की कौन-सी सरप्लस उपज किस देश के बाजार में भेजी जा सकती है, संबंधित देश के लिए उत्पाद के क्या मानक आवश्यक हैं और निर्यात के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इसके साथ ही निर्यातकों को राज्य सरकार एवं बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, सहयोग, मार्गदर्शन और अनुदान से संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। बोर्ड का उद्देश्य किसानों और निर्यातकों को बाजार, गुणवत्ता और निर्यात की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि कुछ समय पहले तक उत्तर प्रदेश के निर्यातक मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन आज प्रदेश के सभी 75 जिलों में निर्यातक अपनी भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में करीब 3000 निर्यातक विकसित हो चुके हैं, जो किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश से औद्यानिक एवं कृषि आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में 727 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1132 करोड़ रुपये हो गया। प्रदेश की कृषि एवं औद्यानिक उपज अमेरिका, यूएई, जर्मनी, सऊदी अरब, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और स्वीडन सहित विभिन्न देशों तक पहुंच रही है।
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए प्रदेश की उपज गुणवत्तापूर्ण होने के साथ संबंधित देशों के निर्धारित मानकों पर खरी उतरनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के तैयार होने से प्रदेश के कृषि उत्पादों को हवाई कार्गाे के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेजी से पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही जेवर के पास राज्य सरकार द्वारा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण, प्रमाणन और पैकेजिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मंत्री सिंह ने आलू किसानों के हित में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि बाजार में भाव में उतार-चढ़ाव की स्थिति में किसानों को राहत देने के लिए 1000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष का प्रावधान किया गया है। वहीं शीतगृह में भंडारित आलू के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल शीतगृह किराये पर अनुदान तथा प्रमाणित आलू बीज की बिक्री दर में 1000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट देने की व्यवस्था की गई है। बेहतर आलू कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदान की व्यवस्था की गई है।
मंत्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को साकार करने में उद्यान विभाग और राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसानों की उपज को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने, निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ाने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
कार्यशाला में डॉ सी0बी0 सिंह, उप महाप्रबन्धक एपीडा द्वारा प्रदेश में औद्यानिक निर्यात की वर्तमान स्थिति और भविष्य की सम्भावनाओं पर विस्तृत उद्बोधन दिया गया। निदेशक सीआईएसएच लखनऊ द्वारा औद्यानिक फसलों में ’अच्छी कृषि पद्धतियां’ अपनाए जाने पर बल दिया गया। निर्यात के लिए आवश्यक आई.पी.एम. तथा क्वारंटाइन नियमों पर डॉ० शैलेश कुमार सीआईपीएमसी, लखनऊ द्वारा तकनीकी जानकारी प्रदान की। संजय सिंह (सहायक निदेशक, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार, लखनऊ) द्वारा निर्यात प्रोत्साहन हेतु ग्लोबल गैप की आवश्यकता एवं इसके लिए उपलब्ध अनुदान व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया। आलोक श्रीवास्तव सहायक निदेशक, एफआईईओ, कानपुर द्वारा निर्यात हेतु आवश्यक मानक एवं श्रेणीवार तकनीकी जानकारियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। सुधांशु सिंह, क्षेत्रीय निदेशक सी-सार्क, आगरा द्वारा आलू के विषय में तकनीकी जानकारी प्रदान की गयी।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव उद्यान बीएल मीना, निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम, निदेशक सीआईपी आगरा सुधांशु सिंह, संयुक्त निदेशक राजीव वर्मा, डेलाइट के विकास तिवारी, संयुक्त निदेशक डॉ. सर्वेश कुमार, उप महाप्रबंधक एपीडा सीबी सिंह, उपनिदेशक मंडी रामजी मिश्रा, अध्यक्ष कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन तृप्ति सिंह सहित राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।

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