मुख्यमंत्री ने रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर, वाराणसी में जापान के
पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे की पत्नी श्रीमती अकी आबे के साथ
संयुक्त रूप से ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण किया
‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ स्व0 शिंजो आबे के भारत-जापान के
ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक सम्बन्धों को मजबूत
करने में दिए गए योगदान का जीवन्त प्रतीक : मुख्यमंत्री
जापान ने काशी को रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर दिया, आज काशी इसी रुद्राक्ष परिसर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे की स्मृति को संजो रही
यह स्मृति गलियारा उ0प्र0 की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी
और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से स्व0 शिंजो आबे को विनम्र श्रद्धांजलि
25 वर्ष पूर्व, 07 अक्टूबर, 2001 को प्रधानमंत्री जी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री
के रूप में शपथ ग्रहण की थी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और जापान के
पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे के बीच मित्रता की नींव भी उसी दौर में पड़ी थी
प्रधानमंत्री जी तथा श्री शिंजो आबे की मित्रता पद से नहीं,
बल्कि विश्वास से बनी थी, पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली
वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक सम्बन्धों के 75 वर्ष
पूरे होने जा रहे, यह स्मृति गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट
नोएडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित
की जा रही, इन्वेस्ट यू0पी0 में यामानाशी डेस्क की स्थापना की गई
भारत और जापान ने अपनी विरासत और परम्पराओं
को अपने दैनिक जीवन तथा कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा
जापान ‘लैण्ड ऑफ द राइजिंग सन’, उ0प्र0 ‘लैण्ड ऑफ द सन डायनेस्टी’
जापान के पास टेक्नोलॉजी और भारत के पास टैलेण्ट,
जापान के पास अनुभव और भारत के पास युवा ऊर्जा
यामानाशी आज उ0प्र0 के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी कर रहा
नोएडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित
की जा रही, इन्वेस्ट यू0पी0 में यामानाशी डेस्क की स्थापना की गई
काशी और क्योटो दोनों शहरों का नाम ‘क’ अक्षर
से शुरू होता और दोनों प्राचीन शहर : श्रीमती अकी आबे
कन्वेंशन सेण्टर की बाहरी दीवारों पर 108 संख्या में प्रतीकात्मक
रुद्राक्ष लगाए गए, 108 संख्या जापान के लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती
मुख्यमंत्री एवं श्रीमती अकी आबे ने रूद्राक्ष कन्वेंशन
सेण्टर में आयोजित ’नमो बुक फेस्ट’ का अवलोकन किया
लखनऊ : 07 अक्टूबर, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ जापान के सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री रहे स्व0 शिंजो आबे के भारत-जापान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक सम्बन्धों को मजबूत करने में दिए गए योगदान का जीवन्त प्रतीक है। जापान ने काशी को रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर दिया और आज काशी इसी रुद्राक्ष परिसर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे की स्मृति को संजो रही है। रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर भारत-जापान मित्रता का प्रतीक है। यह स्मृति गलियारा दोनों देशों की मित्रता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद वाराणसी में रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे की पत्नी श्रीमती अकी आबे के साथ संयुक्त रूप से स्व0 शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि दुनिया के सबसे प्राचीन शहर वाराणसी में भारत के अभिन्न मित्र और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे की स्मृति व सम्मान में रुद्राक्ष इण्टरनेशनल कन्वेंशन सेण्टर में स्मृति गलियारे का लोकार्पण करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह स्मृति गलियारा उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से स्व0 शिंजो आबे को विनम्र श्रद्धांजलि है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 25 वर्ष पूर्व, 07 अक्टूबर, 2001 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। प्रधानमंत्री जी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे के बीच मित्रता की नींव भी उसी दौर में पड़ी थी। वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री जी की जापान यात्रा के दौरान उनकी श्री शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। यह मित्रता पद से नहीं, बल्कि विश्वास से बनी थी। पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली। जनसेवा की इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उसी मित्रता की स्मृति को समर्पित गलियारे का लोकार्पण एक अत्यन्त सुन्दर संयोग है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अगस्त, 2007 में भारत की पहली यात्रा पर आए तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री स्व0 शिंजो आबे ने भारतीय संसद को सम्बोधित करते हुए कहा था कि मजबूत भारत जापान के और मजबूत जापान भारत के सर्वोत्तम हित में है। वर्ष 2014 में काशी और क्योटो के बीच पार्टनरशिप समझौता हुआ। वर्ष 2015 में स्व0 शिंजो आबे ने काशी की गंगा आरती में भारतीय आस्था और आध्यात्मिक परम्परा का दर्शन किया। वर्ष 2017 में अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास कर भारत को मोबिलिटी क्रान्ति के नए युग की दिशा में आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2018 में श्री शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री जी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित कर दोनों देशों के सम्बन्धां को आत्मीयता का नया आयाम दिया।
दिल्ली मेट्रो, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर सहित भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की अनेक बड़ी परियोजनाओं में जापान हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है। आज लगभग 1,400 जापानी कम्पनियाँ भारत में कार्य कर रही हैं। भारत-जापान साझेदारी अब सेमीकण्डक्टर, आर्टिफिशियल इण्टेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुँच चुकी है।
जापान के पास टेक्नोलॉजी है और भारत के पास टैलेण्ट है। जापान के पास अनुभव है और भारत के पास युवा ऊर्जा है। जब दो नेताओं की व्यक्तिगत मित्रता दो राष्ट्रों के विश्वास में बदल जाती है, तो इतिहास बदलता है। प्रधानमंत्री जी और स्व0 शिंजो आबे की मित्रता ऐसी ही थी। वर्ष 2021 में स्व0 शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। यह एक सच्चे मित्र का सम्मान था। सितम्बर, 2022 में प्रधानमंत्री जी स्वयं अपने मित्र को अन्तिम विदाई देने टोक्यो पहुँचे। पूरे भारत ने राष्ट्रीय शोक रखा। यह केवल प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि एक आत्मीय रिश्ता था।
मुख्यमंत्री जी ने गोस्वामी तुलसीदास जी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘निज दुख गिरि सम रज करि जाना। मित्रक दुख रज मेरु समाना’ अर्थात अपने पहाड़ जैसे दुःख को धूल के समान और मित्र के धूल जैसे दुःख को पहाड़ के समान समझना ही सच्ची मित्रता की कसौटी है। आज की दुनिया में जब रिश्ते अक्सर लाभ-हानि के आधार पर तय होते हैं, ऐसे समय में बिना किसी लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना कठिन है। भारत सौभाग्यशाली है कि उसे जापान के रूप में ऐसा सच्चा मित्र मिला है। दुनिया जहाँ अपने हितों को देखकर रिश्ते बनाती है, वहीं भारत-जापान के रिश्ते विश्वास पर आधारित हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इसी वर्ष फरवरी में उन्हें जापान जाने का अवसर मिला। टोक्यो और यामानाशी में जापानी कम्पनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश से सम्बन्धित समझौते हुए। 500 किलोमीटर प्रति घण्टे से अधिक की गति से चलने वाली मैग्लेव ट्रेन में यात्रा कर जापान की प्रिसीजन इंजीनियरिंग को नजदीक से देखने का अवसर मिला। जिस यामानाशी में स्व0 शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री जी को अपने घर आमंत्रित किया था, वही यामानाशी आज उत्तर प्रदेश के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी कर रहा है।
अगस्त, 2026 में यामानाशी के गवर्नर के नेतृत्व में 200 से अधिक निवेशकों ने उत्तर प्रदेश का दौरा किया। नोएडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है। इन्वेस्ट यू0पी0 में यामानाशी डेस्क की स्थापना की गई है। जापान के पास प्रिसीजन है, तो उत्तर प्रदेश के पास 25 करोड़ लोगों का विशाल बाजार, देश की सबसे युवा वर्कफोर्स, एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट का व्यापक नेटवर्क तथा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक सम्बन्धों के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। यह स्मृति गलियारा उस अमृत पर्व की पहली भेंट है। भारत और जापान ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपनी विरासत और परम्पराओं को अपने दैनिक जीवन तथा कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परम्पराओं में विकसित हुई है। प्रकृति के प्रति सम्मान, पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक सन्तुलन जापानी सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। भारतीय जीवन पद्धति भी प्रकृति के प्रति सम्मान, समाज के प्रति दायित्व और समस्त मानवता को एक परिवार मानने की भावना पर आधारित है। हमारी संस्कृति का संदेश है ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापान को ‘लैण्ड ऑफ द राइजिंग सन’ कहा जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश ‘लैण्ड ऑफ द सन डायनेस्टी’ है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म सूर्यवंश में हुआ था। सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कौशाम्बी और संकिसा सहित भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े अनेक प्रमुख तीर्थ उत्तर प्रदेश में हैं। जापान की आस्था और बौद्ध परम्परा का मार्ग भी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि काशी और क्योटो दोनों अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा हैं। दोनों ने यह संदेश दिया है कि अपनी विरासत को सम्भालते हुए भी विश्वास और विकास की यात्रा को आगे बढ़ाया जा सकता है। भाषा अलग है, क्षेत्र अलग हैं, लेकिन भाव और मूल्य समान हैं। तीन दिन पूर्व जापान के आइची-नागोया में एशियाई खेल सम्पन्न हुए हैं। जापान में भारतीय खिलाड़ियों को जिस आत्मीयता और सम्मान का अनुभव हुआ, उसने उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। इसके लिए उन्होंने जापान की जनता का हृदय से आभार व्यक्त किया।
यह स्मृति गलियारा नई पीढ़ी के लिए एक जीवन्त क्लासरूम है। यहाँ आने वाला हर युवा यह सीख सकेगा कि दूरदृष्टि रखने वाला एक नेता दो देशों के भविष्य को किस प्रकार नई दिशा दे सकता है। स्वर्गीय शिंजो आबे को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत और जापान की मित्रता प्रत्येक वर्ष पहले से अधिक मजबूत हो और दोनों देश मिलकर वैश्विक शान्ति, समृद्धि, तकनीकी विकास और मानव कल्याण के लिए कार्य करें।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्रीमती अकी आबे ने मुख्यमंत्री जी को मेमोरियल गलियारे के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम द्वारा मेरे पति को सम्मान दिया गया। काशी और क्योटो दोनों शहरों का नाम ‘क’ अक्षर से शुरू होता है और दोनों प्राचीन शहर हैं। कन्वेंशन सेण्टर की बाहरी दीवारों पर 108 संख्या में प्रतीकात्मक रुद्राक्ष लगाए गए हैं। 108 संख्या जापान के लोगों के लिए महत्वपूर्ण होती है। दिसम्बर माह के आखिरी दिन सभी जापानी बुद्ध मन्दिरों में 108 बार घण्टियाँ बजायी जाती हैं। माना जाता है कि सभी मनुष्यों में 108 क्लेश/बुराइयाँ होती हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में मेरे पति काशी आए थे और यहाँ पर उन्होंने माँ गंगा की आरती को देखा। मेरी भी ख्वाहिश थी कि मैं भी बनारस आऊँ और सब कुछ अपने आँखों से देखूँ। आज उनका सपना साकार हुआ।
इस अवसर पर स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन राज्य मंत्री श्री रवीन्द्र जायसवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इसके उपरान्त, मुख्यमंत्री जी एवं श्रीमती अकी आबे ने प्रधानमंत्री जी के संवैधानिक पदों पर 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रूद्राक्ष कन्वेंशन सेण्टर में आयोजित दो दिवसीय ’नमो बुक फेस्ट’ का अवलोकन किया।
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