मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से
87 अत्याधुनिक इण्टरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया

पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन
तथा राष्ट्रपति वीरता पदक से 16 तथा मुख्यमंत्री वीरता पदक से
10 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को सम्मानित किया

कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद निरीक्षक श्री सुनील कुमार की पत्नी को सम्मानित किया

सुरक्षित वातावरण में ही स्वस्थ विचारों को धरातल पर उतारते हुए
समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता: मुख्यमंत्री

शहीद इन्सपेक्टर श्री सुनील कुमार के अदम्य साहस और वीरता
से उ0प्र0 पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र प्राप्त हुआ

पुलिस की वीरता केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था
और नागरिकों के सुरक्षित वातावरण के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका

‘संघर्ष’ पुस्तक प्रत्येक पुलिसकर्मी, प्रत्येक युवा और जीवन में
चुनौतियों का सामना कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए नई प्रेरणा

पुलिस रिफॉर्म को उ0प्र0 ने सबसे पहले लागू किया,
परिणामस्वरूप आज प्रदेश में सात पुलिस कमिश्नरेट

‘सेफ सिटी’ लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रदेश के विभिन्न शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे घटनाओं के
अनावरण और अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे

आज उ0प्र0 पुलिस तकनीक, प्रशिक्षण, अवस्थापना तथा
कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में नई पहचान बना रही

87 इण्टरसेप्टर वाहन सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य जनपदों में जाकर सड़क सुरक्षा के मानकों को
पूरा करने और यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान देंगे

लखनऊ: 01 अक्टूबर, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां सड़क सुरक्षा को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 87 अत्याधुनिक इण्टरसेप्टर वाहनों को फ्लैग ऑफ किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन तथा अदम्य साहस एवं कर्तव्यनिष्ठा का प्रदर्शन करने वाले पुलिस के वीर जवानों एवं अधिकारियों को राष्ट्रपति वीरता पदक तथा मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया। साथ ही, उन्होंने कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद निरीक्षक श्री सुनील कुमार की पत्नी को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान इण्टरसेप्टर वाहनों की उपयोगिता एवं उनकी कार्यप्रणाली पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज का आयोजन वैचारिक चिंतन, वीरता और तकनीक तीनों महत्वपूर्ण आयामों का समन्वय प्रस्तुत करता है। एक ओर पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह के लगभग 35 वर्षों के व्यापक सेवा-अनुभव और चुनौतियों पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन हुआ, दूसरी ओर पुलिसकर्मियों की वीरता का सम्मान और सड़क सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक इण्टरसेप्टर वाहनों का शुभारम्भ किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश पुलिस के वीर जवानों की वीरता को सम्मानित किया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत 16 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को राष्ट्रपति वीरता पदक तथा 10 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को मुख्यमंत्री वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के एस0टी0एफ0 से जुड़े इन्स्पेक्टर श्री सुनील कुमार को भारत सरकार द्वारा उनकी वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस को पहली बार कीर्ति चक्र प्राप्त हुआ है। 22 जनवरी, 2025 को आमने-सामने की मुठभेड़ में चार दुर्दांत अपराधियों को मार गिराने के बाद इन्स्पेक्टर श्री सुनील कुमार स्वयं भी अपराधियों की गोली से गम्भीर रूप से घायल हुए थे और उपचार के बाद उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री जी ने उनकी वीरता को नमन करते हुए उनके परिजनों के प्रति सम्मान एवं संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस की वीरता केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों के सुरक्षित वातावरण के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार की अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को उत्तर प्रदेश पुलिस प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसी भी समाज में स्वस्थ चिन्तन तभी सम्भव है, जब वहां सुरक्षा का वातावरण हो। व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसके पास कितना भी बड़ा पद क्यों न हो, यदि सुरक्षा का वातावरण समाप्त हो जाए तो अराजकता का माहौल बनने में देर नहीं लगती। उत्तर प्रदेश पुलिस का मूल मंत्र ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ है। सुरक्षित वातावरण में ही स्वस्थ विचारों को धरातल पर उतारा जा सकता है और उसी वातावरण में समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। विचार और व्यवहार में तकनीक का समावेश होने पर उसके परिणाम भी सामने आते हैं। आज उत्तर प्रदेश पुलिस की जो नई पहचान बनी है, वह इसी समन्वय का परिणाम है। पुलिस के लिए वैचारिक क्षमता, व्यवहारिक दक्षता, वीरता और तकनीक इन सभी के बीच समन्वय उतना ही महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री जी ने पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह को पुस्तक ‘संघर्ष’ के विमोचन पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपने 35 वर्षों के सिविल पुलिस और चुनौतीपूर्ण राज्यों में कार्य करने के अनुभव को इस पुस्तक के माध्यम से सामने रखा है।  उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक के रूप में उनके कार्यकाल में आतंकवाद और भय के वातावरण जैसी गंभीर चुनौतियां थीं। उस समय तराई क्षेत्र सहित आसपास के क्षेत्रों में सूर्यास्त के बाद आवागमन तक लगभग बंद हो जाता था। उत्तर प्रदेश के साथ उस समय उत्तराखण्ड भी उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा था। लम्बे समय तक प्रदेश और तराई क्षेत्र को जिन चुनौतियों से जूझना पड़ा, उन्हें पुस्तक में अनुभवों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही, असम, नागालैण्ड, पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर राज्यों में सेवा देते हुए प्राप्त अनुभवों को भी श्री प्रकाश सिंह ने ‘संघर्ष’ में समाहित किया है।
‘संघर्ष’ पुस्तक केवल विचारों का संकलन नहीं है, बल्कि उन व्यावहारिक चुनौतियों का दस्तावेज है, जिनका सामना करते हुए श्री प्रकाश सिंह अपनी पूरी सेवा को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह पुस्तक प्रत्येक पुलिसकर्मी, प्रत्येक युवा और जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए नई प्रेरणा बन सकती है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशक प्रभात प्रकाशन को भी इस कृति के प्रकाशन के लिए धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1996 में पुलिस रिफॉर्म के लिए श्री प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। लम्बे समय से उत्तर प्रदेश पुलिस में भी कुछ कमिश्नरेट बनाए जाने की मांग हो रही थी। पुलिस रिफॉर्म को उत्तर प्रदेश ने सबसे पहले लागू किया है। आज तक प्रदेश में सात पुलिस कमिश्नरेट बनाए जा चुके हैं। यह कमिश्नरेट प्रदेशवासियांे को सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण पहल की है। मा0 उच्चत्तम न्यायालय ने वर्ष 2016 से उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य पुलिस बल से ‘सेफ सिटी’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की बात कही थी। आज प्रदेश के विभिन्न शहरों में 14 लाख से अधिक कैमरे घटनाओं के अनावरण और अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिलों में इण्टीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कण्ट्रोल सेण्टर स्थापित किए गए हैं। इससे तकनीक आधारित पुलिसिंग को नई पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने कानून-व्यवस्था की गम्भीर चुनौती थी। उस समय प्रदेश में राजनीतिक नेतृत्व के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होने के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित होती थी। प्रदेश के अनेक जनपदों में दुर्दांत माफियाओं का बोलबाला था और समानांतर सरकारें चलती थीं। पुलिस सुधार के लिए आवश्यक कदम भी नहीं उठाए गए थे। पुलिस की अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति भी खराब थी। पुलिसकर्मियों को जर्जर भवनों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता था। प्रशिक्षण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। उस समय प्रतिवर्ष लगभग 6,000 पुलिसकर्मियों की ही ट्रेनिंग हो पाती थी। दंगों की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश के अनेक हिस्सों में लम्बे समय तक कानून-व्यवस्था की गम्भीर परिस्थितियां बनी रहती थीं। उस परिस्थिति में जनता स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं करती थी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन परिस्थितियों का परिणाम यह था कि उत्तर प्रदेश की पहचान को लेकर भी संकट खड़ा हुआ और प्रदेश को पिछड़े राज्यों की श्रेणी में गिना जाने लगा। वर्ष 2017 के बाद ऐसी निराशा और हताशा को पीछे छोड़ते हुए प्रदेश को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया। इसी क्रम में पुलिस सुधारों को भी लागू किया गया और आज उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीक, प्रशिक्षण, अवस्थापना तथा कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में नई पहचान बना रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सड़क सुरक्षा आज भी प्रदेश के सामने एक बड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 23,000 से 24,000 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु होती है। इन दुर्घटनाओं को तकनीक के उपयोग से नियंत्रित किया जा सकता है और इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। सड़क सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति का विषय नहीं है। एक दुर्घटना से पूरा परिवार प्रभावित होता है और अंततः उसका प्रभाव समाज पर पड़ता है। इसी दृष्टि से आज 25 चारपहिया और 62 दोपहिया अत्याधुनिक इण्टरसेप्टर वाहनों को उत्तर प्रदेश पुलिस को उपलब्ध कराया जा रहा है। यह वाहन सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य जनपदों में जाकर सड़क सुरक्षा के मानकों को पूरा करने और यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान देंगे। आज उत्तर प्रदेश की सुरक्षा, यातायात, सुगमता, सड़क सुरक्षा और आधुनिक पुलिसिंग के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। 87 अत्याधुनिक इण्टरसेप्टर वाहनों का शुभारम्भ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के कार्यक्रम में वैचारिक चिंतन, वीरता और तकनीक तीनों का एक साथ समावेश हो रहा है। यह अवसर उत्तर प्रदेश पुलिस के पुराने और नए अनुभवों को एक साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ने का भी अवसर है। मंच पर उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वर्तमान पुलिस महानिदेशक का एक साथ उपस्थित होना इसी निरन्तरता का प्रतीक है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के विजनरी लीडरशिप एवं मार्गदर्शन में अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेन्स नीति उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार और सूत्र वाक्य बन चुकी है। आज का दिन उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए गौरवशाली और प्रेरणादायी है। एक ही मंच से शौर्य एवं उत्कृष्ट सेवा का सम्मान, सड़क सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का सुदृढ़ीकरण तथा पुलिस सेवा के अनुभवों और विचारों के संरक्षण का कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू की गई है। इसके अन्तर्गत एनफोर्समेन्ट इन्जीनियरिंग, एजुकेशन एण्ड अवेयरनेस, इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेन्ट तथा इमरजेंसी रिस्पांस के समन्वित ढांचे के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच पिछले वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में
7.89 प्रतिशत, मृत्यु में 9.08 प्रतिशत तथा घायलों की संख्या में 8.19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में 1,100 से अधिक बहुमूल्य जीवन को बचाया गया है। यू0पी0 गति ऐप के माध्यम से महानगरों के प्रमुख मार्गों पर यातायात की लाइव और रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। यू0पी0 गति ऐप पर 20 शहरों के 109 सिटी रूट्स पर कन्जेशन प्वाण्इट मैक्सिमम टैªवल टाइम और एवरेज टैªवल टाइम ऑटोमेटिकली कैपचर किया जाता है।
उ0प्र0 के पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि पुलिस सेवा मेरे लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए कुछ करने का माध्यम रही है। 35 वर्षों की सेवा के अनुभवों और चुनौतियों को अपनी पुस्तक ‘संघर्ष’ में संजोने का प्रयास किया है। पुलिस सेवा समाज सेवा का एक बड़ा और सशक्त माध्यम है। मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में माफिया का सर्वनाश किया है। उन्होंने कहा कि पीड़ित और परेशान व्यक्ति जब पुलिस के पास आता है और पुलिसकर्मी उसकी पीड़ा दूर करने तथा उसके आंसू पोंछने का प्रयास करता है, तो उससे मिलने वाला संतोष सेवा की सबसे बड़ी प्रेरणा बनता है।
धर्मगुरु स्वामी श्री धर्मबन्धु ने कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि जो अपने लिए जीता है, उसे इतिहास भुला देता है और जो दूसरों तथा देश के लिए जीता है, उसे इतिहास सदैव याद रखता है। महाराणा प्रताप और सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से हमें यही प्रेरणा मिलती है। पुलिस और नागरिक के बीच बेहतर सामंजस्य होना आवश्यक है। प्रत्येक पुलिसकर्मी नागरिक है और प्रत्येक नागरिक अपने भीतर एक पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी और सजगता रखता है। इसी सामंजस्य से देश और समाज सशक्त होगा। कर्तव्य, अनुशासन, सत्य, सेवा और समर्पण जैसे मूल्य ही एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं।
प्रभात प्रकाशन के प्रतिनिधि श्री पवन अग्रवाल ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री, गृह एवं सूचना श्री संजय प्रसाद सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पूर्व पुलिस अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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