मुख्यमंत्री जनपद बलरामपुर में ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अन्तर्गत
स्टडी टेबल एवं आशीर्वाद पत्र वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए
मुख्यमंत्री ने कृषि मेले का शुभारम्भ कर कृषक लाभार्थियों को कृषि यंत्र वितरित किये
कन्याओं को चुनरी अर्पित कर उन्हें स्टडी टेबल, चॉकलेट एवं प्रसाद भेंट किया
छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद पत्र एवं स्टेशनरी किट प्रदान की
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाली उत्कृष्ट बालिकाओं
को ट्रैक सूट किट वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया
नारी की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन रामराज्य की परिकल्पना को साकार करता,
इसी उद्देश्य से उ0प्र0 में मिशन शक्ति अभियान संचालित किया जा रहा: मुख्यमंत्री
इसी उद्देश्य से उ0प्र0 में मिशन शक्ति अभियान संचालित किया जा रहा: मुख्यमंत्री
आज माँ भगवती के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की उपासना का दिन,
यह अद्भुत संयोग कि आज ही अन्तरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जा रहा
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान प्रारम्भ किया गया, इसका मूल संदेश बेटी को बचाना,
बेटा और बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न करना तथा बेटी को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना
बेटा और बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न करना तथा बेटी को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना
प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा औरविवाह तक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अन्तर्गत गरीब परिवारों की
बेटियों के विवाह के लिए 01 लाख रु0 की सहायता प्रदान की जाती
महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने
के लिए प्रदेश सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही
राज्य में 01 करोड़ से अधिक घरौनियां परिवारों कीमहिला सदस्यों के नाम पर उपलब्ध करायी गई
उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत रसोई गैस कनेक्शन महिलाओं के नाम पर उपलब्ध कराए जा रहे
03 करोड़ से अधिक परिवारों में शौचालयों का निर्माण केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम
लखनऊ: 11 अक्टूबर, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि भारत की सनातन परम्परा में नारी शक्ति के प्रति सम्मान और श्रद्धा का विशेष स्थान रहा है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ भारतीय संस्कृति का शाश्वत उद्घोष है अर्थात जहां नारी की पूजा और उनका सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। इसके विपरीत, जिस स्थान पर नारी का अपमान और अवमानना होती है, वह स्थान नरक के समान हो जाता है। जो समाज नारी शक्ति का सम्मान और अभिनन्दन नहीं कर सकता, वह विकास की बुलन्दियों को कभी नहीं छू सकता। नारी की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन रामराज्य की परिकल्पना को साकार करता है। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति अभियान संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी आज जनपद बलरामपुर के देवीपाटन मन्दिर परिसर में शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अन्तर्गत स्टडी टेबल एवं आशीर्वाद पत्र वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कृषि मेले का शुभारम्भ कर कृषक लाभार्थियों को कृषि यंत्र वितरित किये। कन्याओं को चुनरी अर्पित कर उन्हें स्टडी टेबल, चॉकलेट एवं प्रसाद भेंट किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को आशीर्वाद पत्र एवं स्टेशनरी किट प्रदान की तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाली उत्कृष्ट बालिकाओं को ट्रैक सूट किट वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने देवीपाटन मन्दिर में दर्शन-पूजन भी किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज माँ भगवती के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की उपासना का दिन है। यह अद्भुत संयोग है कि आज ही अन्तरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष में दो बार, बासन्तिक और शारदीय नवरात्रि के माध्यम से जगत जननी मां भगवती की उपासना करते हुए समाज मातृशक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान प्रारम्भ किया गया। इसका मूल संदेश बेटी को बचाना, बेटा और बेटी के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न करना तथा बेटी को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। देश में नारी के सम्मान, अधिकार और स्वावलम्बन के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए। ‘नारी शक्ति वन्दन अधिनियम’ के माध्यम से संसद और विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और विवाह तक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के अन्तर्गत बेटी के जन्म के बाद उसके पंजीकरण से लेकर टीकाकरण, पहली कक्षा, छठी कक्षा, नौवीं कक्षा तथा आगे की पढ़ाई के विभिन्न चरणों में 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। हाईस्कूल के बाद डिप्लोमा या अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छुक बेटियों को भी योजना के अन्तर्गत सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस प्रकार बेटियों की जन्म से लेकर शिक्षा तक की यात्रा में सरकार सहयोग करती है। विवाह योग्य होने पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अन्तर्गत गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए 01 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 05 लाख से अधिक गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह सम्पन्न कराए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की भूमि पर मालिकाना अधिकार उपलब्ध कराने के लिए घरौनी की व्यवस्था लागू की गई है। पहले आबादी की भूमि पर स्वामित्व का स्पष्ट अभिलेख नहीं होने के कारण दबंग लोग कब्जा कर लेते थे और गरीब एवं कमजोर परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब घरौनी के माध्यम से जिस भूमि पर परिवार का मकान है, उस पर उसके मालिकाना अधिकार को सुनिश्चित किया जा रहा है। 01 करोड़ से अधिक घरौनियां परिवारों की महिला सदस्यों के नाम पर भी उपलब्ध कराई गई हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन के माध्यम से 01 करोड़ 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रतिमाह 01 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा है। सरकार ने यह भी तय किया है कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत आवास की धनराशि परिवार की महिला सदस्य के नाम पर उपलब्ध कराई जाए, जिससे वह आवास की स्वामिनी बन सके। उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत रसोई गैस कनेक्शन भी महिलाओं के नाम पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी प्रकार तीन करोड़ से अधिक परिवारों में शौचालयों का निर्माण केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत के इतिहास का कोई भी कालखण्ड ऐसा नहीं रहा, जिसमें नारी शक्ति ने अपनी प्रतिभा, पराक्रम और योगदान से समाज को नई दिशा न दी हो। रामायण काल में माता कौशल्या, माँ जानकी और माता शबरी के उदाहरण हमारे सामने हैं। भगवान श्रीराम ने माता अहिल्या को सम्मान प्रदान कर उनके गौरव की पुनर्स्थापना का संदेश दिया। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माता देवकी के गर्भ से हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण यशोदा मैय्या ने किया। आज भी प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी यशोदा मैय्या का स्मरण श्रद्धा और सम्मान के साथ करता है। द्रौपदी भारतीय समाज में आदर्श नारी के रूप में सम्मानित हैं। विदुषी नारियों की चर्चा में मैत्रेयी और गार्गी के नाम विशेष रूप से लिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की नारी ने विदेशी आक्रान्ताओं के दौर में भी अपनी शक्ति और साहस का परिचय दिया। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने सनातन परम्परा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा ध्वस्त किए गए मन्दिरों के पुनरुद्धार, धार्मिक स्थलों के विकास, घाटों के निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अनेक कार्य किए। काशी विश्वनाथ, सोमनाथ और केदारनाथ सहित अनेक धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार में उनका योगदान स्मरणीय है। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय संस्कृति, सुशासन और जनसेवा की प्रतीक हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना अवन्तीबाई लोधी, वीरांगना ऊदा देवी पासी और वीरांगना झलकारी बाई जैसी महान नारियों ने अपने साहस और बलिदान से भारतीय समाज को नई दिशा दी। रानी लक्ष्मीबाई ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया। इन वीरांगनाओं का जीवन आज भी देश की बेटियों को साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। स्वतंत्र भारत में भी महिलाओं ने अपने परिश्रम और प्रतिभा से समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परम्परा भी नारी सम्मान का प्रमाण है। संविधान निर्माताओं ने संविधान निर्माण के समय ही महिलाओं को पुरुषों के समान मतदान का अधिकार प्रदान किया, जबकि दुनिया के अनेक आधुनिक लोकतंत्रों में महिलाओं को यह अधिकार बहुत बाद में मिला। यह भारत के संस्कारों और उसकी प्रगतिशील सामाजिक चेतना का परिचायक है। हमारे पर्व और त्योहार इन्हीं संस्कारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। यदि हम माँ भगवती के प्रति सच्ची श्रद्धा रखते हैं, तो हमारा दायित्व है कि प्रत्येक नारी को सम्मान दें, उसकी सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहें और स्वावलम्बन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सहयोग प्रदान करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें आकांक्षी जनपद बलरामपुर में बेसिक शिक्षा परिषद तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अध्ययनरत बेटियों को सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिले के मण्डलायुक्त और प्रशासन द्वारा स्टडी टेबल वितरण का जो अभिनव मॉडल प्रारम्भ किया गया है, वह बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नौ दुर्गा स्वरूप बालिकाओं को सम्मानित करने, उन्हें स्टडी टेबल प्रदान करने और अन्य छात्राओं का उत्साहवर्धन करने का उद्देश्य बेटियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकें।
मुख्यमंत्री जी ने बेसिक शिक्षा की पूर्ववर्ती स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में प्रवेश लेने वाली प्रत्येक 100 बालिकाओं में से लगभग 20 बालिकाएं बीच वर्ष में ही पढ़ाई छोड़ देती थीं और फिर विद्यालय नहीं लौटती थीं। जब इस स्थिति के कारणों की समीक्षा की गई तो सामने आया कि विद्यालयों में पेयजल और शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं थी। सरकार ने विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाने, पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में सुधार करने पर विशेष ध्यान दिया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि समीक्षा में यह भी सामने आया कि 60 से 70 प्रतिशत तक बालिकाएं बिना जूते-मोजे के विद्यालय जाने के लिए मजबूर थीं। अनेक बच्चों के पास भीषण सर्दी में पहनने के लिए स्वेटर और ऊनी वस्त्र तक उपलब्ध नहीं थे। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने प्रत्येक बच्चे को वर्ष में दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, पुस्तकें, स्वेटर, जूते और मोजे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की। आज प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 01 करोड़ 60 लाख बच्चों को इन सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विद्यालयों में बेहतर फर्श, फर्नीचर और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई है। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की जा रही हैं, ताकि उन बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा और तकनीक का लाभ मिल सके, जिनकी पहुंच पहले कम्प्यूटर और स्मार्ट क्लास तक नहीं थी। शिक्षा के क्षेत्र में यह परिवर्तन बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने तथा उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन, रोजगार और कृषि विकास सहित प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा रहा है। शारदीय और बासन्तिक नवरात्रि का संदेश भी यही है कि महिला और पुरुष दोनों को विकास की मुख्यधारा से समान रूप से जोड़ा जाए तथा उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर और वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज शारदीय नवरात्रि का शुभारम्भ और अन्तरराष्ट्रीय बालिका दिवस का संयोग समाज को बेटियों के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है। उन्होंने कहा कि आगामी नौ दिनों तक जगत जननी माँ भगवती का अनुष्ठान और पूजन किया जाएगा। दशमी के दिन भगवान श्रीराम की विजय के उत्सव को विजयादशमी के रूप में भव्यता के साथ मनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज कार्यक्रम में कृषि मेले का शुभारम्भ करते हुए भी उन्हें प्रसन्नता हुई है। बलरामपुर पहले आकांक्षी जनपद था। राष्ट्रीय सरयू नहर परियोजना के पूर्ण होने तथा उसकी विभिन्न शाखाओं के विकास से क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। परियोजना की विभिन्न शाखाओं के कार्य पूरे होने से बलरामपुर जनपद और देवीपाटन मण्डल में कृषि विकास को नई गति मिलेगी। कृषि मेले के माध्यम से किसान कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों, आधुनिक तकनीकों और नए प्रयोगों को देखने-समझने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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